धार्मिक प्रतिबंधों से लक्षित हत्याओं तक: राज्यों में बढ़ती दलित-विरोधी हिंसा और घृणा गुजरात में जाति-आधारित हिंसक हत्याओं से लेकर मध्य प्रदेश में सामाजिक बहिष्कार तक, यह रिपोर्ट देशभर में बढ़ते जातिगत अत्याचार और संवैधानिक सुरक्षा की खामियों को सामने लाती है।

05, May 2026 | CJP Team

संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत, “अछूत” प्रथा को सभी रूपों में खत्म कर दिया था, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल की घटनाओं को देखते हुए अब कमजोर होता दिख रहा है। तमिलनाडु से गुजरात तक और मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक, ये घटनाएं सिर्फ आंकड़ों की गड़बड़ियां नहीं हैं, ये एक गहरी जड़ जमा चुकी “श्रेणीबद्ध असमानता” के लक्षण हैं। इस असमानता में, जब कोई दलित अपनी गरिमा का दावा करता है- चाहे वह प्रेम के जरिए हो, धार्मिक कामों में हिस्सा लेकर हो, या शादी जैसे साधारण उत्सव के जरिए हो- तो उसका सामना जानलेवा हिंसा या सामाजिक बहिष्कार से होता है।

यह रिपोर्ट जातिआधारित नफरत के दिल दहला देने वाले पांच मामलों को एक साथ पेश करती है। इसमें बारीकी से बताया गया है कि कैसे सामाजिक दबदबाप्रशासन की लापरवाही और धार्मिक शुद्धता की सोच मिलकर दलित समुदाय से उनके जीवन और आजादी के मूल अधिकार को छीनते रहते हैं।

सीजेपी हेट स्पीच के उदाहरणों को खोजने और प्रकाश में लाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इन विषैले विचारों का प्रचार करने वाले कट्टरपंथियों को बेनकाब किया जा सके और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जा सके। हेट स्पीच के खिलाफ हमारे अभियान के बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया सदस्य बनें। हमारी पहल का समर्थन करने के लिए, कृपया अभी दान करें!

तमिलनाडु में एक दलित युवक लापता होने के बाद मृत पाया गयापरिवार का आरोप है कि हत्या का संबंध दूसरी जाति के साथ प्रेमसंबंध से है

तमिलनाडु (पुदुकोट्टई)

21 अप्रैल कोपुदुकोट्टई जिले के कुलाथुर तालुका के नाडुपट्टी गांव में, 20 साल का एक दलित युवक आरहरिहरन एक फोन कॉल आने के बाद लापता हो गया। दो दिन बाद 23 अप्रैल को जंगल के पास मवेशी चरा रहे गांव वालों को पानी से भरी एक खदान में एक शव तैरता हुआ मिला। शव की पहचान हरिहरन के रूप में हुई।

हरिहरन का 19 साल की लड़की के साथ प्रेमसंबंध थाजो एक दबदबे वाली जाति से थी। लगभग पांच महीने पहलेदोनों ने घर से भागने की कोशिश की थी। इसके बाददोनों परिवारों को कीरानूर पुलिस स्टेशन बुलाया गयाजहां दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और दोनों को अलग कर दिया गया।

शव मिलने के बादवेल्लानूर पुलिस ने 24 अप्रैल को बीएनएस की धारा 194 के तहत एक मामला दर्ज किया। हरिहरन के पितापीराजकुमार (50) की शिकायत परपुलिस ने इसे एक संदिग्ध मौत का मामला माना। परिवार ने शव लेने से मना कर दिया और मांग की कि इसे हत्या का मामला मानकर दर्ज किया जाए। पोस्टमॉर्टम किया गया और 27 अप्रैल को शव परिवार को सौंप दिया गया।

हरिहरन के पितापीराजकुमार ने कहा, “यह हत्या दूसरी जाति की लड़की के परिवार वालों ने कीक्योंकि हरिहरन का उस लड़की के साथ प्रेमप्रसंग चल रहा था।” ‘ मूकनायक‘ ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया।

25 अप्रैल को FIR में बदलाव किया गया और उसमें BNS की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसानाऔर SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(va) को जोड़ा गया। FIR में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया हैउनमें लड़की के पिता राजेंद्रनउसके भाई शनमुगसुंदरम और एक अन्य व्यक्तिकृष्णन शामिल हैं।

इस मामले की जांच अभी पुदुकोट्टई शहर के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) कर रहे हैं।

दलित समुदाय के लोगों से मंदिर के लिए अपनी थालियां और पानी लाने को कहा गया

गुजरात (जूनागढ़)

29 अप्रैल कोजूनागढ़ जिले के विसावदर तालुका के भूताडी गांव में एक राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरानदलित समुदाय के सदस्यों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।

आयोजक समिति ने लगभग दस दलित व्यक्तियों को आमंत्रित किया था। हालांकिनिमंत्रण में कुछ शर्तें भी थींजिनके अनुसार उन्हें दूसरों के खाना खा लेने के बाद अलग से खाना था और अपनी थालियां गिलास खुद लाने थे।

उन्हें यह भी कहा गया था कि, “अपने घर से अपनी थालियां और गिलास लेकर आना… मुख्य पूजापाठ के दौरान मंदिर परिसर के बाहर ही रहना।” ‘ मूकनायक‘ ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया।

25 वर्षीय अजय चतुर बोरिचा ने इन शर्तों को लेकर विसावदर पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज कराई। इसके बाददलित समुदाय के सदस्यों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया। गांव में होने वाला सामूहिक भोज रद्द कर दिया गयाजबकि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही संपन्न हुआ। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है जिनमें बाबू उका हापानीनरेंद्र भानजी सिरोयारामनिक समजी सोरठियाअतुल भीखा सिरोया और फुला पोपट सिरोया शामिल हैं। यह मामला SC/ST (अत्याचार निवारणअधिनियम और BNS, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।

नवविवाहित दलित जोड़े को कथित तौर पर मंदिर में प्रवेश से रोका गया

मध्य प्रदेश (खरगोन)

26 अप्रैल को खरगोन जिले मेंएक दलित जोड़ा– निर्मल कनाडे और उनकी पत्नी– ने हनुमान मंदिर में पूजाअर्चना करने के लिए प्रवेश करने का प्रयास किया। शुरुआत में मंदिर बंद पाया गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बादजोड़े को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके बादबंजारा और पटेल समुदायों के सदस्यों वाली एक पंचायत ने बैठक की।

 

पंचायत ने उस जोड़े और उनसे जुड़े दो अन्य दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस‘ के मुताबिकइस फैसले में आर्थिक जुर्माना भी शामिल था।

रिपोर्ट के अनुसार, “पंचायत ने ऐलान किया कि जो भी इन तीनों परिवारों से किसी भी तरह का मेलजोल रखेगा या उन्हें कोई सामान बेचेगाउसे 11,000 रुपये का जुर्माना देना होगा।

इस ऐलान के बादस्थानीय दुकानदारों ने प्रभावित परिवारों को सामान बेचना बंद कर दिया। निर्मल कनाडे ने एक वीडियो शेयर कियाजिसमें उन्होंने पूरी स्थिति के बारे में बताया और मदद की गुहार लगाई। बाद में पुलिस ने दखल दिया और बताया कि बातचीत के जरिए मामला सुलझा लिया गया हैऔर सभी पाबंदियां हटा दी गई हैं।

अब तो दलित भी बग्घी पर बैठकर बारात निकालेंगे” – दलित बारात पर की गई टिप्पणी

उत्तर प्रदेश (शाहजहांपुर)

20 अप्रैल को शाहजहांपुर जिले के तिलहर थाना क्षेत्र में पड़ने वाले लाई खेड़ा गांव मेंबरेली से एक बारात एक दलित परिवार के घर पहुंची। बारात के दौरानराजपाल यादव नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने यह टिप्पणी की कि “अब तो दलित भी बग्घी पर बैठकर बारात निकालेंगे।

इस टिप्पणी के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हो गईजो देखते ही देखते दो गुटों के बीच हिंसक झड़प में बदल गई।

पुलिस ने बताया कि दो बारातें एक ही समय परएक ही जगह पहुंच गई थींजिसकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई। राजपाल यादव और चार अन्य लोगों के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिताऔर SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसारइस घटना के सिलसिले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।

अमरेली अस्पताल की कैंटीन मेंबचे हुए खाने और जाति पूछने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई मारपीट में एक दलित युवक की मौत

गुजरात (अमरेली)

20 अप्रैल को अमरेली जिले के शांताबा जनरल अस्पताल मेंगोपालग्राम गांव के रहने वाले 24 वर्षीय महेश प्रेमजी राठौड़ की मारपीट के बाद मौत हो गई। महेश अपने 70 वर्षीय चाचा की देखभाल के लिए अस्पताल में मौजूद थे। अस्पताल की मुफ्त कैंटीन में खाना खाते समय उन्हें कुछ बेचैनी महसूस हुईजिसके बाद उन्होंने अपने खाने का कुछ हिस्सा फेंक दिया। कैंटीन चलाने वाले भरत आचार्य ने खाना बर्बाद करने के लिए महेश से 50 रुपये का जुर्माना मांगा। जब महेश ने उन्हें 500 रुपये का नोट दियातो आचार्य ने बाकी पैसे (खुल्लेलौटाने से मना कर दिया और महेश से उसकी जाति और गांव के बारे में पूछताछ करने लगे।

जब आचार्य को पता चला कि महेश दलित समुदाय से ताल्लुक रखता हैतो आरोप है कि आचार्य और उनके साथियों ने मिलकर प्लास्टिक के पाइपों से महेश के साथ बेरहमी से मारपीट की। महेश बेहोश हो गया और तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई।

मूकनायक‘ के अनुसारउसके पिता प्रेमजी राठौड़ ने कहा:

मेरे बेटे की हत्या महज़ 50 रुपये के लिए कर दी गई। उसे प्लास्टिक के पाइपों से तब तक पीटा गयाजब तक उसकी सांसें थम नहीं गईं… हम तब तक शव नहीं लेंगेजब तक सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं हो जाता।

परिवार ने तब तक शव लेने से इनकार कर दियाजब तक कि उचित आरोप दर्ज नहीं कर लिए गए। विशेष अत्याचार न्यायालय ने यह तय करने के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट मांगी कि क्या धारा 302 (हत्यालागू की जानी चाहिए या नहीं।

खास बात यह है कि तमिलनाडुगुजरातमध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से सामने आई घटनाओं में जातिआधारित भेदभावहिंसा और बहिष्कार का एक ही जैसा पैटर्न अलगअलग रूपों में लगातार देखने को मिल रहा है। इन मामलों में सार्वजनिक जगहों पर जाने पर रोकसामाजिक कार्यक्रमों के दौरान लगाई गई शर्तेंसामाजिक बहिष्कारमंदिर में प्रवेश या सामाजिक समारोहों में हिस्सा लेने जैसी रोज़मर्रा की बातों पर होने वाली हिंसा शामिल है। अलगअलग इलाकों में ऐसी घटनाओं का बारबार होनामौजूदा कानूनों के तहत उपलब्ध कानूनी सुरक्षा और उपायों को लागू करने को लेकर लगातार बनी चिंताओं की ओर इशारा करता हैइन कानूनों में जातिआधारित अपराधों से निपटने वाले प्रावधान भी शामिल हैं।

हालांकि इन मामलों में FIR, गिरफ्तारियों और जांच की खबरें आई हैंलेकिन घटनाओं का क्रम यह बताता है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कानून होने के बावजूद समाज में ऐसी घटनाएं लगातार होती जा रही हैं।

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