दो महीनों के भीतर तीन भड़काऊ भाषणों के चलते CJP ने अल्पसंख्यक आयोग में शिकायत दर्ज कराई और हस्तक्षेप की मांग की CJP की शिकायत में महाराष्ट्र में पिछले दो महीनों के भीतर आर्थिक बहिष्कार, सामाजिक बहिष्कार और हिंसा के लिए की गई अपीलों को उजागर किया गया है।

22, May 2026 | CJP Team

‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में महाराष्ट्र के तीन लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने की शिकायत दर्ज कराई है। जिन तीन लोगों के खिलाफ यह शिकायत की गई है, वे हैं – शरद पोंक्षे, संग्राम बापू भंडारे पाटिल और अनिल महाराज देवलेकर। अलग-अलग मौकों पर इन लोगों ने अल्पसंख्यकों को बदनाम किया है, उन्हें समाज से अलग करने की मांग की है, और कुछ मामलों में तो उनके खिलाफ हिंसा भड़काने की भी बात कही है। इन भाषणों के जवाब में, CJP ने अल्पसंख्यक आयोग से इस मामले में दखल देने की अपील की है, क्योंकि देश में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करना ही आयोग का मुख्य दायित्व है।

इन लोगों के भाषणों के वीडियो ऑनलाइन सर्कुलेट हुए थे और इन तीनों ने कई तरह के आपत्तिजनक तरीकों से अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव करने की मांग की है।

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शरद पोंक्षे के मामले में, उन्हें मुसलमानों और ईसाइयों के आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करते हुए देखा गया था। उन्होंने यह दावा किया कि मुसलमान पूरी दुनिया पर कब्जा करने और उसे “दारुल इस्लाम” में बदलने की साजिश रच रहे हैं और वे हिंदुओं के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा हैं। उन्होंने आगे कहा, “मेरे घर में किसी भी काम के लिए अगर किसी टेक्नीशियन की जरूरत पड़ती है… [या] अगर मैं सब्जी या फल खरीदने जाता हूं, तो किसी भी हाल में, मैं सिर्फ किसी हिंदू व्यक्ति से ही संपर्क करूंगा।” वह अपने भाषण को सुनने वाले सभी लोगों को ऐसा ही करने और मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करने के लिए उकसाते हैं। अपनी शिकायत में, CJP ने इन बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए यह भी बताया है कि ऑक्सफैम इंडिया और NCDHR की साल 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बहिष्कार का सामना करने वाले लोगों को औसतन 30 से 70 प्रतिशत तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। “सामाजिक दबाव” के चलते, कई मुस्लिम दुकानदारों के कारोबार बंद हो गए हैं, और कुछ जगहों पर तो पुलिस ने भी उन्हें अपनी दुकानें बंद रखने की सलाह दी है।

संग्राम बापू भंडारे पाटिल ने अपने भाषण में “लव जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे भड़काऊ नारों का इस्तेमाल करके लोगों के मन में डर पैदा करने की कोशिश की। उन्होंने लगातार मुसलमानों को हिंदुओं का और विशेष रूप से हिंदू महिलाओं का दुश्मन बनाकर पेश किया। वह यहीं नहीं रुके; उन्होंने तो लोगों से यहां तक अपील की कि वे मुसलमानों का सामाजिक बहिष्कार करके उनके खिलाफ लड़ाई लड़ें। वह दावा करते है कि, “वे लड़कियां [जो मुसलमानों से बातचीत करती हैं] जिस्मफरोशी (वेश्यावृत्ति) के धंधे में धकेल दी जाती हैं। उनके साथ बच्चों को जन्म देने वाली ‘फैक्ट्रियों’ जैसा बर्ताव किया जाता है। हमारी हिंदू बेटियों और बहनों की जिंदगी बर्बाद हो रही है।” शिकायत में यह बताया गया कि ऐसे भड़काऊ और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करके वह अपने सुनने वालों के मन में मुसलमानों के प्रति नफरत पैदा कर रहे है।

आखिर में, CJP की शिकायत में अनिल महाराज देवालेकर के बयानों का जिक्र किया गया, जिन्होंने सीधे तौर पर अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा भड़काने की बात कही। उन्होंने मुस्लिम बच्चों को मार डालने का आह्वान करते हुए कहा, “अगर किसी जिहादी कोख से कोई अफज़ल, शाइस्ता, औरंगजेब या टीपू पैदा होता है, तो उस जिहादी को वहीं के वहीं खत्म कर देना चाहिए!” वह गांधी की हत्या करने वाले गोडसे का महिमामंडन करते है, और अपने सुनने वालों से इसे बहादुरी की मिसाल मानने को कहते है। वह मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के लिए “बिना हथियारों के कोई आजादी नहीं” जैसे जुमलों का इस्तेमाल करते है। इन जुमलों के साथ-साथ वह महिलाओं से यह भी कहते है कि अगर मुसलमान उन्हें “बुरी नजर” से देखें, तो वे उनके खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए हथियार अपने पास रखें। शिकायत के मुताबिक, उसके बयान हिंसा भड़काने, रूढ़िवादिता फैलाने, गलत जानकारी देने और समाज में अशांति पैदा करने वाले दूसरे भड़काऊ तरीकों से भरे हुए हैं।

शिकायत में उस कार्यक्रम के संदर्भ को भी समझाया गया है जहां अनिल महाराज ने अपना भाषण दिया था, और यह दिखाया गया है कि कैसे ये कार्यक्रम लगातार दुश्मनी फैलाने के मंच बनते रहे हैं। विराट हिंदू सम्मेलन (वह कार्यक्रम जिसने अनिल महाराज को मंच दिया) अतिचरमपंथी समूहों द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम हैं। VHS अतिहिंदुत्ववादी वक्ताओं के लिए भड़काऊ भाषण देने का एक मंच रहा है। शिकायत के अनुसार, अतीत में इस कार्यक्रम में कई ऐसे मौके आए हैं जब उनके मंच से दिए गए भाषणों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं। शिकायत में कहा गया है कि “ये कार्यक्रम और भाषण हमारे संविधान द्वारा अपनाए गए मूल्यों को चोट पहुंचाते हैं।”

शिकायत में उन सभी प्रासंगिक दंडात्मक प्रावधानों की सूची दी गई है जो इन बयानों के खिलाफ लागू होते हैं। इनमें शामिल हैं: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196, 197, 352, 353। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे ये भाषण संवैधानिक प्रावधानों, विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 द्वारा परिकल्पना की गई समाज के विपरीत हैं।

शिकायत के जरिए, CJP ने अल्पसंख्यक आयोग से कई तरह की राहत की मांग की। सबसे पहले, इसने आयोग से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 9(1)(d) के तहत इस शिकायत का तत्काल संज्ञान लेने और इस मामले में पूरी तरह से जांच शुरू करने का अनुरोध किया। साथ ही, इसने आयोग से पुलिस को यह निर्देश देने के लिए भी कहा कि वे नफरती भाषणों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ, जैसा कि पहले बताया गया है, BNS की प्रासंगिक धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज करें। शिकायत में आयोग से कानून का सख्ती से पालन करवाने और राज्य सरकारों को ऐसे कार्यक्रमों को रोकने का निर्देश देने की मांग की गई, विशेष रूप से सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया। अंत में, CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आग्रह किया कि वे दस्तावेजों में दर्ज नफरती सामग्री को तत्काल हटा दें और उन खातों के खिलाफ कार्रवाई करें जो सुनियोजित तरीके से सांप्रदायिक नफरत फैला रहे हैं।

शिकायत यहां पढ़ी जा सकती है:

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