CJP ने कालीचरण महाराज के भड़काऊ भाषणों पर उठाए सवाल, मुस्लिम बहिष्कार और भीड़तंत्र के आह्वान पर तत्काल कार्रवाई की मांग शिकायत में बताया गया है कि कैसे साजिश की थ्योरी, डर फैलाना और खुद कानून हाथ में लेने की अपील धीरे-धीरे संवैधानिक समानता और धर्मनिरपेक्षता को खत्म कर रही हैं।

09, Jan 2026 | CJP Team

सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज (NCM) के सामने एक शिकायत दर्ज की है, जिसकी कॉपी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशकों को भी भेजी गई है। इसमें खुद को धार्मिक गुरु बताने वाले कालीचरण महाराज (जिन्हें अभिजीत धनंजय सराग के नाम से भी जाना जाता है) द्वारा लगातार नफरत भरे भाषण देने के परेशान करने वाले पैटर्न को उजागर किया गया है। शिकायत में अक्टूबर 2024 और जनवरी 2025 के बीच कई राज्यों में दिए गए बार-बार, सार्वजनिक और भड़काऊ भाषणों को रिकॉर्ड किया गया है, जिसमें भारत के मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है। इन भाषणों में उन्हें बुरा बताया गया, साजिश की थ्योरी फैलाई गईं और सार्वजनिक और आर्थिक जीवन से बाहर करने की खुली अपील की गई।

CJP की शिकायत कोई अलग–थलग मामला नहीं है। यह हाल के मामलों को उसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायतों, FIR और पहले की गई अपीलों के लंबे इतिहास से जोड़ती है, जिसमें अगस्त 2024 में सबमिट की गई एक डिटेल्ड शिकायत भी शामिल है। इस रिकॉर्ड के बावजूद, कालीचरण महाराज प्रमुख पब्लिक प्लेटफॉर्म पर बने हुए हैं – अक्सर धार्मिक या मीडिया द्वारा स्पॉन्सर किए गए इवेंट्स में – जहां उनकी बातें और भी ज्यादा स्पष्ट और खतरनाक होती जा रही हैं, जो CJP के अनुसार रोकथाम की सिस्टमैटिक विफलता को दिखाती है।

सीजेपी हेट स्पीच के उदाहरणों को खोजने और प्रकाश में लाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इन विषैले विचारों का प्रचार करने वाले कट्टरपंथियों को बेनकाब किया जा सके और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जा सके। हेट स्पीच के खिलाफ हमारे अभियान के बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया सदस्य बनें। हमारी पहल का समर्थन करने के लिए, कृपया अभी दान करें!

पहले भेजी गई शिकायतें यहां, यहां और यहां पढ़ी जा सकती हैं।

बढ़ते तनाव का एक पैटर्न

शिकायत तीन खास पब्लिक इवेंट्स पर आधारित है। सबसे चौंकाने वाली घटना 8 जनवरी, 2025 को भोपाल में News18 द्वारा आयोजित “राइजिंग मध्य प्रदेश” इवेंट में हुई। एक बड़े मंच से, कालीचरण महाराज ने खुलेआम कुंभ मेले से मुस्लिम विक्रेताओं को बाहर निकालने की बात कही, “थूक जिहाद” और “पेशाब जिहाद” जैसी मनगढ़ंत साजिशों को बढ़ावा दिया, दावा किया कि मुसलमान भारत के नहीं हैं और मुस्लिम आबादी की बढ़ोतरी को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के रूप में दिखाया। उन्होंने आगे मुसलमानों पर राम मंदिर को नष्ट करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और “गज़वा–ए–हिंद” की साजिश का जिक्र किया, जिसमें भारतीय मुसलमानों को सभ्यता आधारित युद्ध में लगे आंतरिक दुश्मन के रूप में दिखाया गया।

CJP इस बात पर जोर देता है कि यह कोई कोड वाली या प्रतीकात्मक भाषा नहीं थी। भाषा साफ और पक्की थी, जो मुसलमानों को समान नागरिकता के किसी भी वैध दावे से इनकार करती थी और उन्हें साझा नागरिक और आर्थिक जगहों से हटाने के लिए प्रोत्साहित करती थी।

इससे पहले, 8 दिसंबर, 2024 को महाराष्ट्र के नालासोपारा में एक श्री देवी भागवत कथा में कालीचरण महाराज ने साफ तौर पर कई झूठे दावे किए जिनमें से कुछ ये थे कि हर दिन 40,000 हिंदू महिलाएं “लव जिहाद” का शिकार होती हैं, कि 1,00,000 मंदिर हमलावरों द्वारा नष्ट किए गए और कि हर दिन 1,00,000 गायों का कत्ल किया जाता है। CJP के अनुसार, ये मनगढ़ंत आंकड़े मुसलमानों के प्रति डर, गुस्सा और दुश्मनी पैदा करने के साफ इरादे से तथ्यों के रूप में पेश किए गए थे।

25 अक्टूबर, 2024 को पुणे में एक गणेश जन्मोत्सव कार्यक्रम में उन्होंने चेतावनी दी कि मुसलमानों का इरादा 15 साल के अंदर भारत को शरिया देश बनाने का है, उन्होंने डेमोग्राफिक अलार्मवाद में हिस्सा लिया और खुले तौर पर गौ रक्षा को सही ठहराया, यह सुझाव देते हुए कि निजी व्यक्तियों द्वारा गैर–कानूनी कार्रवाई जायज और जरूरी भी है।

कानून में यह हेट स्पीच क्यों है- सिर्फ विचार नहीं

CJP की शिकायत सुरक्षित भाषण और दंडनीय हेट स्पीच के बीच एक स्पष्ट कानूनी और संवैधानिक अंतर बताती है। यह तर्क देता है कि विचाराधीन भाषण एक पूरे धार्मिक समुदाय पर सामूहिक अपराध का आरोप लगाते हैं, मुसलमानों को राष्ट्र से संबंधित होने के उनके अधिकार से वंचित करते हैं, उन्हें साजिशकर्ता और अस्तित्व के लिए खतरा बताते हैं और सार्वजनिक स्थानों और आजीविका से बहिष्कार की सक्रिय रूप से वकालत करते हैं। CJP का तर्क है कि लव जिहाद, डेमोग्राफिक युद्ध और गज़वा–ए–हिंद जैसी साजिशों का बार–बार समर्थन करना, अलग–थलग अतिशयोक्ति या बयानबाजी के बजाय वैचारिक निरंतरता और इरादे को दर्शाता है।

शिकायत में आगे इस बात पर जोर दिया गया है कि इस तरह के भाषण को खतरनाक होने के लिए हिंसा के लिए स्पष्ट आह्वान की जरूरत नहीं है। सतर्कता को वैध बनाकर और बार–बार यह सुझाव देकर कि राज्य संस्थान अपर्याप्त या मिलीभगत वाले हैं, बयानबाजी एक ऐसा माहौल बनाती है जहां भेदभाव और हिंसा सामाजिक रूप से स्वीकार्य हो जाती है।

सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधानिक भाईचारे के लिए खतरा

व्यक्तिगत जवाबदेही से परे, CJP इस मुद्दे को एक बड़े संवैधानिक संकट के दायरे में रखता है। शिकायत में चेतावनी दी गई है कि इस तरह की लगातार नफरत भरी बातें सामाजिक दहशत पैदा करती हैं, भेदभाव को सामान्य बनाती हैं और धार्मिक अल्पसंख्यकों को ज्यादा जोखिम में डालती हैं। मुसलमानों को धार्मिक सभाओं या बाजारों से बाहर रखने की अपील, जब सार्वजनिक मंचों से की जाती है और ऑनलाइन बड़े पैमाने पर फैलाई जाती है तो यह पूर्वाग्रह को एक कार्रवाई योग्य सामाजिक कार्यक्रम में बदल देती है।

CJP डिजिटल प्रसार के माध्यम से नुकसान के तेजी से बढ़ने पर भी जोर देता है। भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर किए गए हैं, जिससे उनकी पहुंच भौतिक दर्शकों से कहीं ज्यादा बढ़ गई है और पूरे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच डर बढ़ गई है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन का तर्क है कि इस तरह की बयानबाजी प्रस्तावना में निहित भाईचारे के संवैधानिक मूल्य पर सीधा हमला करती है। बार–बार यह दावा करके कि मुसलमान भारत के नहीं हैं, ये भाषण नागरिकता को एक संवैधानिक गारंटी से बदलकर एक सशर्त स्थिति में बदलने की कोशिश करते हैं जो धार्मिक अनुरूपता पर निर्भर है।

कानूनी उल्लंघन और राज्य की जवाबदेही

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत कई संज्ञेय अपराधों की पहचान की गई है, जिसमें धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय एकता के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण आरोप, आपराधिक धमकी, जानबूझकर अपमान और सार्वजनिक खतरे पैदा करने वाले बयान से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। CJP का कहना है कि समय और स्थानों पर ऐसे भाषणों की पुनरावृति आपराधिक दायित्व को बढ़ाती है और आचरण का एक निरंतर क्रम स्थापित करती है।

सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों का हवाला देते हुए, CJP इस बात पर जोर देता है कि पुलिस अधिकारी संवैधानिक रूप से वक्ता की सामाजिक या राजनीतिक स्थिति की परवाह किए बिना, नफरत भरे भाषण के खिलाफ स्वतः कार्रवाई करने के लिए बाध्य हैं। शिकायत में तर्क दिया गया है कि निष्क्रियता संवैधानिक कर्तव्य की उपेक्षा के बराबर है और संस्थागत सहमति का संकेत देती है।

तत्काल और स्पष्ट कार्रवाई की अपील

CJP का दखल, असल में, सार्वजनिक जीवन में नफरत भरी बातों को सामान्य बनाने के खिलाफ एक चेतावनी है। संगठन चेतावनी देता है कि लगातार नफरत फैलाने वालों को बिना किसी नतीजे के बार–बार बड़े प्लेटफॉर्म पर जगह देना, स्वीकार्य बातचीत के स्तर को कम करता है और सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता पर लोगों का भरोसा कम करता है।

तेज, पारदर्शी और कानूनी तौर पर उचित कार्रवाई की मांग करते हुए, CJP इस बात पर जोर देता है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता, कानून के सामने समानता और भाईचारे की रक्षा करने के बारे में है। यह चेतावनी देता है कि अभी निर्णायक कार्रवाई न करने से सिर्फ सजा से बचने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और भारत के सार्वजनिक क्षेत्र में सांप्रदायिक नफरत और गहरी होगी।

पूरी शिकायत यहां पढ़ी जा सकती है।

Related:

NBDSA pulls up Times Now Navbharat for communal, agenda-driven broadcast on ‘Miya Bihu’; orders removal of inflammatory content

CJP files complaint with ECI against Arunachal Minister Ojing Tasing for threatening voters with denial of welfare schemes

CJP moves NCM against surge in Hate Speech at Hindu Sanatan Ekta Padyatra

CJP files complaint over Malabar Hill incident involving Aadhaar checks and targeting of Muslim vendors

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Go to Top
Nafrat Ka Naqsha 2023