
हेट वॉच: यूपी-उत्तराखंड में बीता हफ्ता जिहाद के नैरेटिव और जबरन नारेबाजी के नाम रहा असेंबली के मंचों से लेकर बाराबंकी की गौशाला तक, आठ दिनों में हेट स्पीच की आठ घटनाओं से पता चलता है कि अल्पसंख्यकों को अलग-थलग करने का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है।
17, Aug 2026 | CJP Team
दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार दोनों राज्यों ने अपनी नीतियों की साफ तौर पर धार्मिक ब्रांडिंग की है। इन दोनों राज्यों में सांप्रदायिक तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में मामले बढ़े हैं, जैसा कि ‘बुलडोज़र एनफोर्समेंट मॉडल’ और अतिक्रमण-विरोधी अभियानों से साफ पता चलता है। ‘इंडिया हेट लैब’ (IHL) की 2025 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, हेट स्पीच की घटनाओं (266) के मामले में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर पहले और उत्तराखंड चौथे (155) स्थान पर रहा। दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत से भी कम और ईसाइयों की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, 28 जून – 5 जुलाई, 2026
घटनाओं का क्रम
28 जून – इलायचीपुर, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
लोनी से BJP विधायक नंदकिशोर गुर्जर को स्थानीय विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान एक बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत भारतीय मुसलमान मूल रूप से हिंदू थे। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग “कमजोर” थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया, जबकि जो लोग “मजबूत” थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन करने के बजाय “राक्षसों” का मुकाबला किया।
रिपोर्टिंग की अवधि के दौरान यह कोई अकेली घटना नहीं थी। गुर्जर का नाम 3 जुलाई को दिए गए एक और हेट स्पीच मामले में भी आया, जिसका जिक्र घटनाओं के क्रम में किया जाएगा। (घटना संख्या 6 देखें)
सीजेपी हेट स्पीच के उदाहरणों को खोजने और प्रकाश में लाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इन विषैले विचारों का प्रचार करने वाले कट्टरपंथियों को बेनकाब किया जा सके और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जा सके। हेट स्पीच के खिलाफ हमारे अभियान के बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया सदस्य बनें। हमारी पहल का समर्थन करने के लिए, कृपया अभी दान करें!
वैसे, IHL की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में दो हेट स्पीच मामले सीधे तौर पर गुर्जर से जुड़े पाए गए। 17 मार्च, 2025 को उत्तर प्रदेश के लोनी में, गुर्जर ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस का महिमामंडन करते हुए मुसलमानों को “राक्षस” और “पशु” कहा। 26 अप्रैल को, उन्होंने विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को शपथ दिलाई और उनसे उन सभी लोगों की पहचान करने और उन्हें बाहर निकालने का आग्रह किया जो “पाकिस्तान का समर्थन करते हैं”; उन्होंने उन्हें “टोपीवाले,” “जिहादी,” और “रोहिंग्या बांग्लादेशी” कहकर संबोधित किया। सांप्रदायिक भाषणों के इस दर्ज इतिहास के अलावा, ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के रिकॉर्ड बताते हैं कि गुर्जर पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं जिनमें आरोप तय किए गए हैं, जैसे:
- IPC की धारा 295: किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना।
- IPC की धारा 436: घर या अन्य संपत्ति को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ से नुकसान पहुंचाना।
- IPC की धारा 332: किसी सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने के लिए जान-बूझकर चोट पहुंचाना।
- IPC की धारा 506: आपराधिक धमकी।
- IPC की धारा 147 के तहत दंगा करने के तीन आरोप।
- IPC की धारा 148 के तहत घातक हथियार लेकर दंगा करने के दो आरोप।
- IPC की धारा 353 के तहत सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करने के दो आरोप।
- IPC की धारा 427: नुकसान पहुंचाने वाली शरारत।
- IPC की धारा 504: शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान करना।
इन सबको मिलाकर देखें तो भड़काऊ सार्वजनिक बयानों- जो अक्सर लक्षित हिंसा की शुरुआत होते हैं- का एक बार-बार दिखने वाला पैटर्न और साथ ही आपराधिक मामलों का एक लंबा रिकॉर्ड सामने आता है।
29 जून – चंपावत, उत्तराखंड
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्य सेवक संवाद’ कार्यक्रम में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने राज्य के संशोधित धर्मांतरण-रोधी कानून को लागू करने, ‘ऑपरेशन कालनेमी’ चलाने और जिसे उन्होंने “लैंड जिहाद” कहा, उससे 12,000 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन को “आजाद” कराने का श्रेय अपनी सरकार को दिया। उन्होंने “लव जिहाद,” “थूक जिहाद” और “मजार जिहाद” का भी जिक्र किया और उन्हें समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी बताया। उन्होंने राजनीतिक विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप भी लगाया क्योंकि विपक्ष ने “अवैध” कब्ज़ों और मजारों (मुस्लिम धार्मिक स्थलों) के खिलाफ कार्रवाई का विरोध किया था।
यह बयान धामी की उसी स्क्रिप्ट को हूबहू दोहराता है, जिसका इस्तेमाल उन्होंने 2024 के बाद से हरिद्वार, देहरादून, चमोली और सागर में कम से कम आधा दर्जन रिकॉर्ड किए गए भाषणों में किया है। ‘द क्विंट’ और ‘डेक्कन हेराल्ड‘ ने इसको लेकर रिपोर्ट की है।
IHL के अनुसार, धामी “2025 में हेट स्पीच देने वाले सबसे ज्यादा सक्रिय नेता के तौर पर उभरे हैं, जिन्होंने 71 भाषण दिए हैं।”
रिपोर्ट में कहा गया है, “CM धामी और उनके सहयोगी अक्सर ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसी मुस्लिम-विरोधी साज़िशों का जिक्र करते रहे हैं और साथ ही आबादी में बदलाव को लेकर डर भी फैलाते रहे हैं।”
30 जून – देहरादून, उत्तराखंड
विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल के नेता विकास वर्मा ने हनुमान चालीसा के साप्ताहिक कार्यक्रम में एक ऐसे मामले का जिक्र किया जिसकी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में हिंदू छात्रों को तिलक, कलावा और जनेऊ हटाने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने ईसाई और इस्लाम धर्म पर सनातन धर्म को लंबे समय से निशाना बनाने का आरोप लगाया और उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों में छात्रों को सिखाया जाता है कि गैर-मुस्लिम “काफिर” होते हैं और उनका सिर काट देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो लोग मदरसों से शिक्षा लेते हैं, वे आतंकवाद को अपनाने में हिचकिचाएंगे नहीं।
वर्मा ने इसी साप्ताहिक कार्यक्रम में पहले भी मस्जिदों, मदरसों और “अराजकतावादियों” के बारे में लगभग एक जैसे दावे किए हैं। इस साल मई में, उन्होंने देहरादून के एक मशहूर फुटवियर शोरूम में दक्षिणपंथी समूह का नेतृत्व किया था। एक वीडियो क्लिप भी वायरल हुई थी जिसमें वे मुस्लिम कर्मचारियों से उलझते और उनके नेम टैग छीनकर उन पर “जिहादी” लिखते हुए देखे गए थे।
‘द वायर’ की एक जांच में पाया गया कि देहरादून के बजरंग दल के सदस्य इसी तरह के कंटेंट वाले सोशल मीडिया पेज चला रहे थे।
30 जून – लोनी, ग़ाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
हिंदू रक्षा दल के नेता सनी बजरंगी ने हनुमान चालीसा कार्यक्रम में “लव जिहाद” को हिंदू समाज को खोखला करने वाला “दीमक” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि “जिहादी” हिंदू महिलाओं को फंसाने के लिए अपनी पहचान छिपाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हिंदू एकजुट नहीं हुए, तो 20 साल के भीतर आबादी के ढांचे में बदलाव को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।
1 जुलाई – डोमरियागंज, सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
बीजेपी के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि “लव जिहाद” तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने एक “मुल्ला” पर हिंदू महिला के “अपहरण” के ऐसे आरोप का जिक्र किया जिसकी पुष्टि नहीं हुई है। सिंह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं से “विधर्मी” (धर्म-विरोधी) और “कुकर्मी” (बुरे काम करने वाले) तत्वों पर नजर रखने को कहा। उन्होंने ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों की जांच की भी मांग की।
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फरवरी 2022 में, ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) की एक रिपोर्ट में सिंह के खिलाफ हेट स्पीच के लिए दो FIR दर्ज होने की बात कही गई थी। CJP ने उनके अतीत के और भी ज्यादा भड़काऊ बयानों का जिक्र किया, जिसमें उन हिंदुओं को धमकी देना भी शामिल था जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया था- उन्होंने कहा था कि वे “उनका खून टेस्ट करवाएंगे”। रिपोर्ट यहां पढ़ें।
3 जुलाई – लोनी, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
इस घटना में भी लोनी के BJP विधायक नंदकिशोर गुर्जर का नाम सामने आया है, जो हाल ही में रिपोर्ट की गई घटना 1 में भी शामिल थे। सड़क चौड़ी करने के एक प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान, गुर्जर ने मुसलमानों को “सूअर” और “बीमारी” कहा। उन्होंने एक गांव की तारीफ की जहां किसी भी “जिहादी” को बसने नहीं दिया जाता और कहा कि जहां कभी ये “सूअर” घूमते थे, वहां अब अस्पताल बने हैं। उन्होंने निवासियों को “बांग्लादेशियों” को गोदाम किराए पर न देने की चेतावनी दी और उन्हें बाहर निकालने का संकल्प लिया।
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दस महीने पहले, सितंबर 2025 में, बागपत में एक योग कार्यक्रम के दौरान गुर्जर का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वे कह रहे थे, “यहां सूअर और बांग्लादेशी रोहिंग्याओं को बसाया जा रहा है और वे देश को बर्बाद कर देंगे।”
4 जुलाई – बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
श्री राम सनातन सेवा समिति और गौ रक्षा दल के विमलेश शर्मा ने 15-20 लोगों के एक समूह के साथ मिलकर एक मुस्लिम व्यक्ति से पूछताछ की, उस व्यक्ति पर गाय के बारे में कथित टिप्पणी करने का आरोप था। वीडियो में उन्हें उस व्यक्ति को बार-बार थप्पड़ मारते और गालियां देते हुए देखा जा सकता है, जबकि वह सफाई देने की कोशिश कर रहा है। समूह उसे खींचकर एक शेड में ले गया, और उसे घुटनों के बल बैठकर बछड़े के पैर छूने और बाद में “जय श्री राम” के नारे लगाने के लिए मजबूर किया। सूत्रों से यह भी पता चला है कि उसे गोमूत्र पीने के लिए मजबूर किया गया था।
Location:Barabanki, Uttar Pradesh, India ,
According to reports, Vimlesh Sharma, State President of the Shri Ram Sanatan Seva Samiti, along with members of the Gau Raksha Dal, allegedly assaulted a Muslim man after accusing him of making objectionable remarks about a cow.The… pic.twitter.com/BFPrrT5Ik1
— Rising Falcon (@TheRFTeam) July 5, 2026
‘सियासत डेली’ ने यह भी रिपोर्ट किया है कि हिंदुत्व समूह की अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में उस व्यक्ति पर हिंसक और खून-खराबे वाली होली की धमकी देने का आरोप लगाया गया था।
सोशल मीडिया X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, विमलेश शर्मा ने मारपीट को सही ठहराते हुए आरोप लगाया कि पीड़ित ने उनकी माताओं और बहनों के लिए अपशब्द कहे थे और उनके खान-पान के तरीकों का मजाक उड़ाया था, उन्होंने कहा कि इन्हीं हरकतों की वजह से समूह को ऐसा कदम उठाना पड़ा।
Location: Barabanki, Uttar Pradesh
Vimalesh Sharma, the state president of Shri Ram Sanatan Seva Samiti, released a video in which he said that he beat a Muslim man accused of making offensive remarks about cows and forcibly made him drink cow urine. https://t.co/K8zCAB2L17 pic.twitter.com/eYt8ux4M8Q
— The Muslim (@TheMuslim786) July 7, 2026
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक (SP) के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने कहा कि पुलिस को इस घटना की जानकारी नहीं थी।
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने जबरदस्ती धार्मिक पूजा-पाठ कराने जैसी घटनाओं की निंदा की है और इसे “बेहद परेशान करने वाला” बताया है।
The assault and humiliation of a Muslim man in Barabanki, including forcing him to perform religious acts against his will, is deeply disturbing. Such acts are not expressions of faith but crimes that violate human dignity and the Constitution.
When vigilante groups believe they… pic.twitter.com/jq7Hlgb0Ki
— Dr Syed Naseer Hussain, M P (@NasirHussainINC) July 4, 2026
5 जुलाई – कैंथोली, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
अमित थपलियाल नाम के एक व्यक्ति ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर ईसाइयों की प्रार्थना सभा को रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि गांव में केवल हिंदू धर्म को ही मानने की अनुमति है। थपलियाल ने सभा में शामिल लोगों पर पैसे लेकर आने का आरोप लगाया और कहा कि अगर वे ईसाई धर्म अपनाना चाहते हैं, तो उन्हें अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण का लाभ छोड़ना होगा।
मूल्यांकन
इनमें से किसी भी घटना के खिलाफ कोई FIR या केस दर्ज होने की खबर नहीं मिली है। असल में, इनमें से ज्यादातर घटनाओं की रिपोर्ट मुख्यधारा की मीडिया में भी नहीं आई थी। दुर्भाग्य से, यह इस बात का सबूत है कि पुरानी और मुख्यधारा की मीडिया ऐसी नफरत भरी बातों को कितनी लापरवाही से लेती है, इसे नजरअंदाज करने से बिना सज़ा के बच निकलने का कल्चर बना रहता है। हालांकि, वीडियो में अल्पसंख्यकों के खिलाफ लामबंदी का एक पैटर्न दिखता है जो भारत में सांप्रदायिक राजनीति, बहुसंख्यक राष्ट्रवाद और हेट स्पीच पर स्थापित अध्ययनों से मेल खाता है। वे दिखाते हैं कि कैसे राजनीतिक बयानबाजी, खुद कानून हाथ में लेने वाली कार्रवाई (विजिलेंटे एक्शन) और दबदबे का दिखावा एक-दूसरे को मजबूत करते हैं, ताकि धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों और ईसाइयों को देश, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया जा सके।
ये घटनाएं ‘मॉरल पैनिक’ और ‘कॉन्स्पिरेसी फ्रेमिंग’ उदाहरण हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदायों को हिंदू बहुसंख्यकों की आबादी, इलाके या सांस्कृतिक अखंडता को कमजोर करने की मिली-जुली कोशिशों में शामिल दिखाया जाता है। इस मूल्यांकन का मकसद किसी एक समुदाय को पूरी तरह से पवित्र और दूसरे को अपराधी बताना नहीं है। हालांकि, इस तरह का फैला हुआ संगठन और हेट स्पीच, खतरे का माहौल बनाकर, सरकार की कड़ी कार्रवाई और जनता की दुश्मनी को सही ठहराते हैं। वे एक काल्पनिक अंदरूनी दुश्मन खड़ा करते हैं, जिसके होने से भेदभाव वाली राजनीति को सही ठहराया जा सकता है।
‘जिहाद’ के अलग-अलग रूपों का बार-बार और थकाऊ जिक्र, मुसलमानों को ‘बांग्लादेशी’ या ‘सूअर’ बताना, ईसाइयों की प्रार्थना सभाओं में बाधा डालना, और किसी से जबरदस्ती धार्मिक नारा लगवाकर अपमानित करना- ये सब दिखाते हैं कि राजनीतिक सत्ता और खुद कानून हाथ में लेने वालों की लामबंदी एक-दूसरे को कैसे मजबूत करती है, और इसके पीछे एक जैसी विचारधारा काम करती है।
अहम बात यह है कि 8 में से 3 घटनाओं के लिए एक मौजूदा मुख्यमंत्री और एक विधायक को जिम्मेदार ठहराया गया है। सरकारी राजनीतिक भाषण और खुद कानून हाथ में लेने वाली कार्रवाई का यह मेल लोकतांत्रिक गिरावट और जातीय राष्ट्रवाद (एथनो-नेशनलिज्म) की एक अहम विशेषता है। उत्तराखंड में 9 जून, 2026 को नगर निकाय चुनाव हुए और उत्तर प्रदेश ने अपने त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों में देरी की है, वहां लगभग 58,000 ग्राम पंचायतों में 2026 की गर्मियों तक वोटर-लिस्ट का काम चल रहा है।
लेकिन मुख्यमंत्रियों के भाषणों, स्थानीय राजनीतिक नेताओं और बजरंग दल, हिंदू रक्षा दल और गौ-रक्षा समूहों जैसे संगठनों में एक जैसी भाषा का इस्तेमाल यह बताता है कि एक जैसी विचारधारा फैल रही है। ऐसी विचारधारा जो संविधान के खिलाफ है। हालांकि, ऐसी भाषा का इस्तेमाल अक्सर किया गया है, यहां तक कि राष्ट्रीय स्तर पर और सरकार के मुखिया की तरफ से भी।
2024 के आम चुनावों से पहले हेट स्पीच के चलन को ‘इंडिया हेट स्पीच मॉनिटर’ ने रिकॉर्ड किया है। इसे यहां देखा जा सकता है।
इनमें से कई घटनाओं को एक बड़े और अच्छी तरह से रिकॉर्ड किए गए अभियान से अलग नहीं किया जा सकता। मई 2025 से, भारतीय अधिकारियों ने हजारों लोगों को हिरासत में लिया है और कई मामलों में उन्हें तुरंत बांग्लादेश भेज दिया है; इनमें से बड़ी संख्या में बंगाली बोलने वाले भारतीय मुसलमान शामिल हैं जिनके पास नागरिकता के वैध दस्तावेज थे। यूपी में भी पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को गलत तरीके से हिरासत में लेने के मामले सामने आए हैं, जिनके पास वैध आधार और वोटर आईडी कार्ड थे।
उत्तराखंड में प्रार्थना सभाओं में बाधा डालने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। जुलाई 2024 में, देहरादून में एक प्रार्थना सभा पर भीड़ के हमले के बाद 11 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई, इस हमले में क्रूस (ईसाई धर्म का प्रतीक) को नुकसान पहुंचाया गया था।
Uttarakhand: Hindutva mob attacks Christian prayer meet in Dehradun. A group of Hindutva ‘activists’ barged into the house and assaulted people including women present inside, Forcefully entered inside the house and vandalised a Christian cross, prayer room and bedroom, made… pic.twitter.com/BLD7vbXp2Y
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) July 16, 2024
इसी तरह, मई 2022 में उत्तराखंड के पुरोला में एक हथियारबंद समूह ने प्रार्थना सभा में घुसकर हंगामा किया। SC आरक्षण का दर्जा छोड़ने की जबरन मांग इस तरह की घटनाओं की एक पहचान बन गई है। हालांकि, ये समूह जबरन धर्म परिवर्तन की प्रथाओं को लेकर भी आशंकित रहते हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 और 299 के तहत अशांति फैलाने या दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना की भावना को बढ़ावा देने पर सजा का प्रावधान है। धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों के बीच हेट स्पीच के लिए यही एकमात्र उपाय है। इसमें अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है, और अगर यह घटना किसी पूजा स्थल या धार्मिक समारोह में होती है तो सजा पांच साल तक बढ़ सकती है।
हालांकि, किसी एक मामले से हटकर देखें तो असल समस्या कानून को लागू करने और सजा दिलाने की दर (कनविक्शन रेट) की है। इस साल मई में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच के लिए अलग से गाइडलाइंस की जरूरत नहीं है। ऐसी लामबंदी के मामलों में अपने ही पहले के दखल देने वाले निर्देशों और आदेशों से सुप्रीम कोर्ट का पीछे हटना, अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती सार्वजनिक बयानबाजी की संस्कृति के प्रति संस्थागत उपेक्षा का भी संकेत है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का विस्तृत विश्लेषण यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।
IHL के अनुसार, 2025 में देश भर में 1,318 हेट स्पीच के मामले सामने आए, यानी हर दिन लगभग चार मामले, जिनमें से 98 प्रतिशत में अकेले या ईसाइयों के साथ मुसलमानों को निशाना बनाया गया।
(CJP की लीगल रिसर्च टीम में वकील और इंटर्न शामिल हैं, इस रिपोर्ट को तैयार करने में तनिष्का शाह ने सहायता की)
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