
CJP ने महाराष्ट्र और बंगाल में कथित सांप्रदायिक नफरती भाषणों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारियों के समक्ष कई शिकायतें दर्ज कर कथित नफरती भाषणों के लिए FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
19, May 2026 | CJP Team
‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) ने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने कई शिकायतें दर्ज कराई हैं। इन शिकायतों में BJP विधायक और महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश नारायण राणे, BJP नेता हरि मिश्रा और दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर हर्षू ठाकुर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। इन पर आरोप है कि उन्होंने ऐसे भाषण दिए जिनमें सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाली बातें, भड़काऊ बयानबाजी, धमकियां, साजिश की थ्योरी और मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान शामिल था।
CJP ने अपनी शिकायतों में कहा है कि ये कथित नफरत भरे बयान संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मिली संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन करते हैं। साथ ही, इन पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, आपराधिक धमकी देने, सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान देने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के जानबूझकर किए गए कृत्यों और हिंसा भड़काने से संबंधित कानूनों के तहत अपराध बनते हैं।
ये शिकायतें मुंबई के चांदिवली और मलाड मालवानी, पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कल्याणी और पुणे जिले के जुन्नार में दिए गए भाषणों से संबंधित हैं।
सीजेपी हेट स्पीच के उदाहरणों को खोजने और प्रकाश में लाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इन विषैले विचारों का प्रचार करने वाले कट्टरपंथियों को बेनकाब किया जा सके और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जा सके। हेट स्पीच के खिलाफ हमारे अभियान के बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया सदस्य बनें। हमारी पहल का समर्थन करने के लिए, कृपया अभी दान करें!
चांदिवली भाषण को लेकर नितेश नारायण राणे के खिलाफ शिकायत: 12 मई, 2026
12 मई, 2026 को दर्ज एक शिकायत में, जिसे महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून–व्यवस्था) श्री निखिल गुप्ता, मुंबई के पश्चिमी क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और मुंबई के साकीनाका पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को संबोधित किया गया था, CJP ने BJP विधायक और महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश नारायण राणे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। आरोप है कि राणे ने 3 मई, 2026 को मुंबई के चांदिवली में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन के दौरान कथित तौर पर एक विभाजनकारी और सांप्रदायिक भाषण दिया था।
CJP ने अपनी शिकायत में कहा है कि राणे ने मुसलमानों के खिलाफ अमानवीय भाषा का इस्तेमाल किया; “लव जिहाद,” “लैंड जिहाद,” “कॉर्पोरेट जिहाद” और “गज़वा–ए–हिंद” जैसी साजिश की थ्योरी फैलाईं; और खुले तौर पर मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार को बढ़ावा दिया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस भाषण के जरिए मुसलमानों को हिंदुओं और भारत के लिए एक अस्तित्व का खतरा (जानलेवा खतरा) बताकर लोगों में डर और दुश्मनी पैदा करने की कोशिश की गई।
CJP के अनुसार, राणे ने बार–बार मुसलमानों को “हरे सांप” कहकर संबोधित किया और वहां मौजूद लोगों से उनका सामना करने का आह्वान किया। शिकायत में भाषण की ट्रांसक्रिप्ट दी गई है, जिसमें ये बयान शामिल हैं:
“[उन्हें] महाराष्ट्र आना चाहिए। इन हरे सांपों (मुसलमानों का जिक्र करते हुए) का तड़पना बंद होना चाहिए। इसीलिए महाराष्ट्र में भगवा झंडा फहराया गया है, यह याद रखना।”
“और इसलिए, एक हिंदू के तौर पर घूमते हुए, पूरे आत्मविश्वास के साथ घूमें। हिम्मत के साथ चलें। अगर यहां कोई हरा सांप तड़प रहा है, तो ताई से सलाह लें और फिर मुझे फोन करें।”
शिकायत में आगे कहा गया कि राणे ने बार–बार भारत को “हिंदू राष्ट्र” बताया और यह इशारा किया कि मुसलमान सोची–समझी साजिशों के जरिए भारत को एक इस्लामी राष्ट्र में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
CJP ने शिकायत में यह भी कहा कि राणे ने हिंदुओं में डर पैदा करने की कोशिश की, यह दावा करते हुए कि अगर मुसलमानों की आबादी बढ़ी, तो वे हिंदुओं की धार्मिक रीतियों में रुकावट डालेंगे।
शिकायत में ये बयान दिए गए हैं:
“आप अपने घर में पूजा नहीं कर पाएंगे। यह भगवा झंडा यहां नहीं फहरा पाएगा। आप अपने माथे पर तिलक नहीं लगा पाएंगे।”
“मां–बहनें अपने सिर पर सिंदूर नहीं लगा पाएंगी।”
CJP के अनुसार, भाषण में पालघर और विरार में हुई कथित सांप्रदायिक घटनाओं का भी जिक्र किया गया था, ताकि मुसलमानों के प्रति नफरत को और बढ़ाया जा सके। शिकायत में राणे की उन टिप्पणियों पर भी खास तौर पर ध्यान दिलाया गया, जिनमें उन्होंने मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार की अपील की थी:
“तो, जब हम उनसे कोई लेन–देन कर रहे हों, उनसे कुछ खरीद रहे हों, या उन्हें नौकरी दे रहे हों–तो सबसे पहले, अगर कोई दुकान पर बैठा है, भले ही दुकान के बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ लिखा हो, कभी–कभी अंदर अब्दुल बैठा होता है।”
“सबसे पहले उससे कहो, ‘पहले मेरे लिए हनुमान चालीसा पढ़ो।’ अगर तुम हनुमान चालीसा पढ़ोगे, तभी मैं तुमसे कुछ खरीदूंगा, वरना नहीं।”
“इसलिए, अगर नौकरी देनी है या कुछ खरीदना है, तो वह सिर्फ हिंदुओं के लिए होना चाहिए– हम सभी का यही रुख होना चाहिए।”
CJP ने शिकायत में कहा कि ये टिप्पणियां धर्म के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव और उन्हें अलग–थलग करने को साफ तौर पर बढ़ावा देने जैसा है और यह मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार के लिए एक सीधी अपील है।
12 मई, 2026 की तारीख वाली शिकायत की एक कॉपी यहां देखी जा सकती है।
राम नवमी यात्रा के दौरान मालाड मालवानी में दिए गए भाषण को लेकर नितेश राणे के खिलाफ शिकायत
28 अप्रैल, 2026 को महाराष्ट्र पुलिस अधिकारियों को संबोधित एक अन्य शिकायत में, CJP ने 26 मार्च, 2026 को मुंबई के मालाड मालवानी में आयोजित राम नवमी यात्रा के दौरान दिए गए भाषण को लेकर नितेश नारायण राणे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
CJP के अनुसार, इस भाषण ने सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा दिया, हिंसा की सीधी धमकियां दीं, और भारत को “हिंदू राष्ट्र” घोषित करके तथा उस इलाके को विशेष रूप से “भगवाधारी” हिंदुओं का बताकर मुसलमानों को अलग–थलग करने का प्रयास किया।
CJP ने शिकायत में कहा कि राणे ने मुसलमानों के खिलाफ परोक्ष संकेत (dog-whistle) के तौर पर “पाकिस्तान” का जिक्र किया और हिंदुत्व विचारधारा का विरोध करने वालों को खुले तौर पर धमकाया।
शिकायत में भाषण के निम्नलिखित अंशों को उद्धृत किया गया है:
“शायद मालाड मालवानी में कुछ लोग भूल गए हैं कि यह हमारा हिंदू राष्ट्र है, यह किसी का पाकिस्तान नहीं है। अगर कोई उस भगवा झंडे को हटाने की कोशिश करेगा, तो हम उसका सिलेंडर दोबारा ऊपर नहीं आने देंगे। अगर कोई फिर से हमारे भगवा झंडे की तरफ बुरी नजर से देखेगा, तो उसकी आंखें निकाल ली जाएंगी और कंचों की तरह उनसे खेला जाएगा।“
CJP ने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियां हिंसा और डराने–धमकाने की खुली धमकियों के समान थीं। शिकायत में आगे कहा गया कि राणे ने विशेष रूप से इलाके में स्थित एक मस्जिद की ओर नारे लगवाए, जिससे टकराव भड़काने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया गया। उद्धृत बयान इस प्रकार है:
“वह आवाज बड़ी मस्जिद तक पहुंचनी चाहिए।“
CJP के अनुसार, ऐसे बयानों का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को डराना और उन्हें भारत के संवैधानिक ढांचे के भीतर ही बाहरी के रूप में चित्रित करना था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि राणे ने आक्रामक सांप्रदायिक लामबंदी के लिए राजनीतिक समर्थन का संकेत देने के लिए “हिंदुत्व विचारधारा वाली सरकार” के अधिकार का हवाला दिया।
28 अप्रैल, 2026 की शिकायत की एक प्रति यहां देखी जा सकती है।
पश्चिम बंगाल में नादिया में चुनावी अभियान के दौरान हेट स्पीच को लेकर हरि मिश्रा के खिलाफ शिकायत
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को संबोधित 6 मई, 2026 की एक शिकायत में, CJP ने BJP नेता हरि मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196, 197, 299, 302, 352 और 353 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है। यह शिकायत 23 अप्रैल, 2026 को नादिया जिले के कल्याणी में एक चुनावी अभियान के दौरान दिए गए भाषण के संबंध में है। CJP ने शिकायत में कहा कि मिश्रा ने मुस्लिम–विरोधी साजिश की थ्योरी फैलाई और झूठा दावा किया कि मुस्लिम–बहुल इलाकों में हिंदू त्योहार नहीं मनाए जा सकते।
शिकायत में भाषण के कुछ अंश शामिल हैं, जिनमें ये बातें कही गई हैं:
“किसी भी ऐसे इलाके में जहां मुस्लिम आबादी 30-35% से ज्यादा है, वहां सरस्वती पूजा नहीं होगी। मालदा और मुर्शिदाबाद जैसी जगहों पर… आपको पहले पास की मस्जिद से इजाजत लेनी पड़ती है। पश्चिम बंगाल की धरती पर बांग्लादेश से भी बदतर हालात होने वाले हैं।”
CJP ने आगे आरोप लगाया कि मिश्रा ने झूठा दावा किया कि भारत का संविधान पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में काम नहीं करता। भाषण के अंशों में यह बात शामिल है:
“मालदा और मुर्शिदाबाद के कई हिस्सों में भारत का संविधान काम नहीं करता। मालदा और मुर्शिदाबाद के लगभग 25-30% इलाकों में भारत का संविधान, नियम, कानून और कायदे लागू नहीं होते।”
शिकायत में उन बयानों का भी जिक्र किया गया है जो आबादी में बदलाव को राजनीतिक बहिष्कार से जोड़ते हैं: “जिस दिन मुसलमानों की आबादी 40-45% से ज्यादा हो जाएगी, उस दिन पश्चिम बंगाल में एक भी हिंदू MP, MLA, पार्षद या चेयरमैन नहीं बचेगा।”
CJP के अनुसार, इन टिप्पणियों का मकसद मुसलमानों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बताना था, और इनका उद्देश्य चुनावी दौर में डर और ध्रुवीकरण पैदा करना था।
6 मई, 2026 की शिकायत की एक प्रति यहां देखी जा सकती है।
पुणे के जुन्नार में ‘विराट हिंदू सम्मेलन‘ में दिए गए भाषण को लेकर हर्षू ठाकुर के खिलाफ शिकायत
6 मई, 2026 की एक अलग शिकायत में, जो महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून–व्यवस्था), पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक और जुन्नार संभाग के पुलिस उपाधीक्षक को संबोधित थी, CJP ने 19 अप्रैल, 2026 को पुणे जिले के जुन्नार में आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन‘ में दिए गए भाषण को लेकर हर्षू ठाकुर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। CJP ने शिकायत में कहा कि ठाकुर ने “फॉरेस्ट जिहाद,” “लव जिहाद,” और “लैंड जिहाद” का जिक्र करके मुस्लिम–विरोधी बातें फैलाईं, और साथ ही ऐसे बयान भी दिए जो हिंसक प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देते थे और इस्लामी संस्थानों तथा दफनाने की रीतियों को निशाना बनाते थे।
शिकायत में निम्नलिखित बयान शामिल हैं:
“जहां भी खाली जमीन होती है, वहां कब्रें बन जाती हैं। अगर आप मदरसों को फंडिंग देना शुरू करेंगे, तो वहां से सिर्फ आतंकवादी ही पैदा होंगे। मुल्ला–मौलवी उन्हें सिखाते हैं कि लड़कियों को ‘लव जिहाद‘ में कैसे फंसाना है और ‘लैंड जिहाद‘ कैसे करना है। उन्हें बम बनाना भी सिखाया जाता है।“
CJP ने आगे उन टिप्पणियों पर भी रोशनी डाली जो मुस्लिम पुरुषों को निशाना बनाती थीं और महिलाओं को हथियार उठाने के लिए उकसाती थीं:
“ये सभी ‘अब्दुल‘ एक जैसे ही होते हैं। हर हिंदू महिला को बस एक हथियार देने की जरूरत है।“
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि ठाकुर ने मुसलमानों को जन्मजात हिंसक साबित करने की कोशिश की, और साथ ही धार्मिक अलगाव और दुश्मनी को बढ़ावा दिया।
6 मई, 2026 की शिकायत की एक प्रति यहां देखी जा सकती है।
जिन न्यायिक उदाहरणों को CJP ने आधार बनाया
महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारियों के सामने दर्ज कराई गई शिकायतों में, CJP ने हेट स्पीच, सांप्रदायिक निशाना बनाने और भड़काऊ बयानबाजी के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकारियों के संवैधानिक दायित्व से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की कई न्यायिक मिसालों का भी हवाला दिया। फिरोज इकबाल खान बनाम भारत संघ [W.P. (Civ.) No. 956 of 2020] मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए, CJP ने कोर्ट की इन टिप्पणियों पर जोर दिया कि “संवैधानिक अधिकारों, मूल्यों और कर्तव्यों के दायरे में कानून के शासन के प्रति समर्पित एक लोकतांत्रिक समाज की नींव समुदायों के सह–अस्तित्व पर टिकी है। भारत सभ्यताओं, संस्कृतियों, धर्मों और भाषाओं का एक संगम है। किसी भी धार्मिक समुदाय को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के तौर पर इस कोर्ट द्वारा बेहद नापसंदगी से देखा जाना चाहिए।“
CJP ने कहा कि नितेश राणे, हरि मिश्रा और हर्षू ठाकुर द्वारा दिए गए भाषणों ने मुसलमानों को साज़िशकर्ता, बाहरी लोग, चरमपंथी और आबादी के लिहाज से खतरा बताया, जिससे समानता, भाईचारा और शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को सीधे तौर पर कमजोर किया गया। शिकायतों में आगे प्रवासी भलाई संगठन बनाम भारत संघ [AIR 2014 SC 1591] मामले का भी जिक्र किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “हेट स्पीच किसी समूह का सदस्य होने के आधार पर व्यक्तियों को हाशिए पर धकेलने की एक कोशिश है” और चेतावनी दी थी कि ऐसी बयानबाजी भेदभाव, बहिष्कार, हिंसा और यहां तक कि नरसंहार की जमीन तैयार कर सकती है। CJP ने कहा कि “लव जिहाद,” “लैंड जिहाद,” “जंगल जिहाद,” “कॉर्पोरेट जिहाद,” आबादी से जुड़ी कथित साजिशों और आर्थिक बहिष्कार के आह्वान का बार–बार जिक्र करके मुसलमानों के खिलाफ डर और दुश्मनी को संस्थागत रूप देने की कोशिश की गई, और इसलिए इस पर तत्काल आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है।
शिकायतों में इसके अलावा अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ [W.P. (C) No. 943 of 2021] मामले में 28 अप्रैल, 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का भी हवाला दिया गया, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया था कि जब भी IPC की धारा 153A, 153B, 295A, 505 और संबंधित प्रावधानों के तहत अपराध होते हैं, तो वे धर्म की परवाह किए बिना हेट स्पीच के खिलाफ खुद संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करें।
BNS, 2023 के तहत हेट स्पीच से जुड़े प्रावधान
CJP ने आगे कहा कि ये भाषण भारतीय न्याय संहिता, 2023 के कई प्रावधानों के दायरे में आते हैं, खासकर धारा 196, 197, 299, 302, 352 और 353 के। शिकायतों के अनुसार, मुस्लिम धार्मिक संस्थानों, शैक्षणिक जगहों और सामाजिक पहचान को बार–बार निशाना बनाना– जैसे कि “हरे सांप,” “जंगल जिहाद,” “लैंड जिहाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना और यह आरोप लगाना कि मदरसे “सिर्फ आतंकवादी” पैदा करते हैं– धारा 196 BNS के तहत धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्यों के बराबर है।
CJP ने कहा कि इन भाषणों में एक पूरे समुदाय की संवैधानिक निष्ठा पर भी सवाल उठाए गए, जिसमें मुसलमानों और इस्लामी संस्थानों को राज्य के लिए खतरा बताया गया; इस तरह इन पर धारा 197 BNS लागू होती है। शिकायतों में आगे आरोप लगाया गया कि दरगाहों, मजारों, दफनाने की रस्मों, इस्लामी विद्वानों और मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं का मजाक उड़ाना, धारा 299 और 302 BNS के तहत धर्म और धार्मिक विश्वासों का जानबूझकर किया गया अपमान माना जाता है।
CJP ने इसके अलावा यह तर्क भी दिया कि लोगों को बार–बार इकट्ठा होने के लिए उकसाना, जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) के बारे में चेतावनी देना, हिंसा की धमकी देना, नागरिकों को हथियारबंद करने की बात करना और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करना– ये सभी धारा 352 BNS के तहत सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर की गई उकसाहट और धारा 353 BNS के तहत ऐसी झूठी जानकारी फैलाना है जिससे डर और सांप्रदायिक अशांति पैदा होने की संभावना हो।
शिकायतों में यह कहा गया कि मुंबई, पुणे और नादिया में दिए गए ये भाषण भड़काऊ सांप्रदायिक बयानबाजी के एक लगातार चल रहे पैटर्न को दर्शाते हैं, जिसका मकसद धार्मिक ध्रुवीकरण को गहरा करना और मुसलमानों के प्रति दुश्मनी को सामान्य बनाना है; इसलिए, संवैधानिक दायित्वों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा तत्काल FIR दर्ज करना और निवारक हस्तक्षेप करना आवश्यक है।
CJP द्वारा उद्धृत महाराष्ट्र DGP के सर्कुलर
CJP ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा फरवरी और अप्रैल 2023 में जारी किए गए उन सर्कुलर का भी जिक्र किया, जो हेट स्पीच के खिलाफ निवारक और दंडात्मक कार्रवाई से संबंधित हैं। शिकायत के अनुसार, सर्कुलर संख्या DGP 20/याचिका संख्या 940/2022/54.2023, जिसकी तारीख 2 फरवरी, 2023 है, में सुप्रीम कोर्ट के 13 जनवरी, 2023 के आदेश का जिक्र किया गया है। इस आदेश में पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि जब भी भाषणों के कारण IPC की धारा 153A, 153B, 295A और 505 के तहत अपराध बनते हों, तो वे खुद से (suo motu) कार्रवाई करें।
इस सर्कुलर में सभी यूनिट कमांडरों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया गया था, और इसमें “आंदोलनों, मोर्चों, भाषणों आदि के कारण कानून–व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले कदम” शामिल हैं।
इसमें विस्तार से निर्देश दिए गए हैं कि जब भी कोई मोर्चा निकाला जाए, तो कौन–से कदम उठाए जाने चाहिए:
“2. सभी यूनिट कमांडरों को ऐसे किसी भी मोर्चे से पहले संबंधित आयोजकों के साथ एक बैठक करनी चाहिए और उचित शर्तों के साथ मोर्चे का रास्ता तय करना चाहिए। सभी सामाजिक समूहों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जानी चाहिए ताकि सभी को स्पष्ट रूप से यह बताया जा सके कि मोर्चे के दौरान उन्हें शांति बनाए रखनी है और कानून–व्यवस्था का पालन करना है। असामाजिक तत्वों के खिलाफ निवारक कार्रवाई की जानी चाहिए। जो लोग शांति और सद्भाव बनाए रखने में मदद करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मोर्चे की ऑडियो–वीडियो रिकॉर्डिंग की जानी चाहिए। पुलिस मुख्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मोर्चे की व्यवस्था के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को लाठी, हेलमेट आदि जैसे उपकरणों की पर्याप्त आपूर्ति हो। यदि कोई कानून–व्यवस्था की स्थिति पैदा होती है, तो तुरंत मामले दर्ज किए जाने चाहिए और गिरफ्तारियां की जानी चाहिए। मोर्चे और आंदोलन के बारे में आगे की जानकारी इकट्ठा करने के लिए खुफिया तंत्र को सक्रिय किया जाना चाहिए और किसी भी सांप्रदायिक घटना को पहले से रोकने के प्रयास किए जाने चाहिए।”
नफरत फैलाने वाले वक्ताओं को रोकने/उन पर मुकदमा चलाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
CJP ने आगे नफरत फैलाने वाले भाषण (हेट स्पीच) और निवारक पुलिसिंग से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला दिया। शिकायतों के अनुसार, 3 फरवरी, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में ‘सकल हिंदू समाज‘ द्वारा प्रस्तावित एक कार्यक्रम के संबंध में निर्देश जारी किए और आदेश दिया कि यदि कार्यक्रम के लिए अनुमति दी जाती है, तो यह इस शर्त के अधीन होगी कि कोई भी नफरत फैलाने वाला भाषण नहीं दिया जाएगा।
अदालत ने ऐसे मामलों में निवारक कार्रवाई करने के संबंध में भी निर्देश निर्धारित किए:
“हम यह भी निर्देश देते हैं कि यदि अनुमति दी जाती है, और यदि Cr.P.C. की धारा 151 के तहत शक्ति का इस्तेमाल करने का अवसर पैदा होता है (जैसा कि ऊपर बताया गया है), तो संबंधित अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह उक्त शक्ति का प्रयोग करे और Cr.P.C. की धारा 151 के जनादेश के अनुसार कार्य करे।”
यहां तक कि वर्ष 2024 में भी, 17 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट की पीठ (न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता) ने इस बात पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी कि याचिकाकर्ताओं को व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ बार–बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि नफरत फैलाने वाले भाषणों से निपटने और उन पर कार्रवाई करने के लिए पहले से ही दिशानिर्देश मौजूद हैं। उक्त सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया, जिसमें यवतमाल (महाराष्ट्र) और रायपुर (छत्तीसगढ़) के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि वे ‘उचित कदम‘ उठाएं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनवरी के आने वाले कुछ दिनों में इन जिलों में होने वाली रैलियों में नफरत फैलाने वाले भाषणों (हेट स्पीच) के लिए कोई उकसावा न हो।
यह आदेश याचिकाकर्ताओं द्वारा जनवरी महीने में हिंदू जनजागृति समिति और भारतीय जनता पार्टी के विधायक टी. राजा सिंह द्वारा आयोजित रैलियों में संभावित नफरत भरे भाषणों को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद पारित किया गया था।
CJP ने कहा कि अदालत ने ऐसे मामलों में निवारक कार्रवाई करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं:
“हम अधिकारियों से यह अपेक्षा करते हैं कि वे इस बात के प्रति सचेत रहें कि हिंसा और नफरत भरे भाषणों के लिए किसी भी तरह का उकसावा स्वीकार्य नहीं है। यवतमाल (महाराष्ट्र) और रायपुर (छत्तीसगढ़) के संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक, आवश्यकतानुसार, जरूरी कदम उठाएंगे। यदि आवश्यक और उचित समझा जाए, तो पुलिस/प्रशासन रिकॉर्डिंग की सुविधा वाले CCTV कैमरे लगाएगा, ताकि किसी भी हिंसा/नफरत भरे भाषण की स्थिति में दोषियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।”
पृष्ठभूमि: नितेश राणे का प्रोफाइल और CJP द्वारा पहले दर्ज की गई शिकायतें
CJP ने अपनी शिकायतों में कहा कि चांदिवली और मलाड मालवानी में दिए गए भाषण कोई अलग–थलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि ये नितेश राणे द्वारा पूरे महाराष्ट्र में कथित तौर पर दिए जा रहे भड़काऊ भाषणों के एक लगातार चल रहे सिलसिले का हिस्सा थीं। CJP के अनुसार, संगठन ने इससे पहले 7 मार्च, 18 मार्च और 28 मार्च, 2025 को सिंधुदुर्ग, पुणे और रत्नागिरी जिलों में राणे द्वारा दिए गए भाषणों के संबंध में शिकायतें दर्ज की थीं।
शिकायतें इन कार्यक्रमों से जुड़ी थीं:
- 8 फरवरी, 2025 को कुंडल में “हिंदू राष्ट्र अधिवेशन”
- 19 फरवरी, 2025 को सावंतवाड़ी में “शिवजन्मोत्सव” कार्यक्रम
- 20 फरवरी, 2025 को रत्नागिरी के नानिधम में सार्वजनिक सम्मान समारोह
- 5 फरवरी, 2025 को पुणे के वाघोली में धार्मिक सभा
CJP ने कहा कि इन सभी कार्यक्रमों में, राणे ने बार–बार “लव जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, मुसलमानों को एक सामूहिक खतरे के तौर पर पेश किया और ऐसे बयान दिए जिनसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दुश्मनी, डर और सामाजिक बहिष्कार भड़क सकता था। शिकायतों में आगे कहा गया कि इस तरह की बयानबाजी, खासकर जब कोई मौजूदा कैबिनेट मंत्री ऐसा करे, तो वह भड़काऊ होती है, उसका कोई सबूत नहीं होता, और वह संवैधानिक सुरक्षाओं का उल्लंघन करती है।
नितेश राणे के खिलाफ FIR और चल रही कानूनी जांच
आफताब सिद्दीकी और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य (2024) मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की न्यायिक निगरानी में, नितेश राणे के खिलाफ कथित हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) के मामलों में पहले ही कई FIR दर्ज की जा चुकी हैं। CJP ने अपनी शिकायतों में इन FIR का ब्योरा दिया और कहा कि ये FIR महाराष्ट्र के अलग–अलग हिस्सों में राणे द्वारा दिए गए सांप्रदायिक भाषणों के लगातार जारी पैटर्न को दिखाती हैं।
मानखुर्द पुलिस स्टेशन (C.R. No. 152/2024)
नितेश राणे के खिलाफ IPC की धारा 153A, 503, 504 और 505 के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायत के मुताबिक, यह मामला उन भाषणों से जुड़ा है जिन्हें मुस्लिम समुदाय के लिए खतरा माना गया और जिनसे सार्वजनिक अशांति फैलने की आशंका थी।
घाटकोपर पुलिस स्टेशन (C.R. No. 521/2024)
मुंबई के उपनगरों में दिए गए भड़काऊ भाषणों के सिलसिले में नितेश राणे और सुभाष अहीर के खिलाफ IPC की धारा 153A, 504, 506 और 188 के तहत मामला दर्ज किया गया।
काशीमीरा पुलिस स्टेशन (C.R. No. 259/2024)
मीरा–भायंदर की घटनाओं के संबंध में नितेश राणे और गीता जैन के खिलाफ IPC की धारा 153A, 153B, 143, 504 और 506 के साथ–साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1) (धारा 135 पढ़े) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मालवानी पुलिस स्टेशन (C.R. No. 298/2024)
मूल रूप से भगवान ठाकुर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें बाद में नितेश राणे को भी आरोपी के तौर पर शामिल किया गया। यह मामला विशिष्ट धार्मिक समुदायों को निशाना बनाने वाले भाषणों के संबंध में IPC की धारा 153A, 504 और 506 के तहत दर्ज किया गया है।
CJP ने आगे बताया कि नितेश राणे के अक्टूबर 2024 के चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर उनके खिलाफ दर्ज 38 FIRs का खुलासा हुआ है, जिनमें से 20 मामले विशेष रूप से हेट स्पीच (द्वेषपूर्ण भाषण) के आरोपों से संबंधित हैं।
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