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अपने ऊपर लगाये गए झूठे इल्ज़ामों का तीस्ता सेतलवाद ने दिया मुह तोड़ जवाब अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को दिए दस्तावेजी तथ्य

08, Apr 2018 | CJP Team

5 अप्रैल को बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रेवाती मोहिते डेरे ने तीस्ता सेतलवाड़ जी और जावेद आनंद जी को 2 मई 2018 तक अंतरिम ट्रांसिट जमानत दे दी. माननीय न्यायालय के आदेश के मुताबिक, 6 अप्रैल को तीस्सा सेतलवाड़ जी और जावेद आनंद जी सुबह 10 बजे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश हुए. दोनों ने 5:00 बजे तक सभी प्रश्नों के जवाब में अपने बयान दर्ज करवाए.

दोनों ने अपनी पूरी जानकारी के हिसाब से एसीपी सीएन राजपूत के नेतृत्व में जांच अधिकारियों की टीम के तमाम सवालों के जवाब दिए. मौखिक बयानों के अलावा उन्होंने कई और दस्तावेज़, जो वे अपने साथ अहमदाबाद ले गए थे, जाँच अधिकारियों को सौंपे. जाँच अधिकारी ने कुछ और दस्तावेजों की माँग की है जो आने वाले 15 दिनों में उपलब्ध करा दिए जायेंगे. जो दस्तावेज दाखिल किये गए हैं और जो अभी जमा किये जाने हैं उनकी सूची यहां देखी जा सकती है:

प्रस्तुत किये गए दस्तावेजों में चार (4) ‘उपयोग प्रमाण पत्र’ जो सबरंग ट्रस्ट के लेखापरीक्षकों द्वारा जारी किए गए हैं. उपयोग प्रमाण पत्र एक वित्तीय रिपोर्ट है, जो अनुदान अवधि के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्रालय से सबरंग ट्रस्ट द्वारा प्राप्त तीन (3) किश्तों में मिली राशियों का ब्यौरा है. कुल प्राप्त राशि: (i) रु. 58,72,500 (ii) रु. 26,66,750 और (iii) रु. 54,20,848 हैं. मंत्रालय द्वारा अगली किस्त जारी किए जाने से पहले हर बार दिए गए अनुदान से किए गए सभी भुगतानों का ब्यौरा देते हुए एक विस्तृत ‘गतिविधि रिपोर्ट’  उपयोग प्रमाण के साथ प्रस्तुत की गयी थी. जैसा कि पिछले और चौथे उपयोग प्रमाण पत्र में दर्शाया गया है, परियोजना की अवधि के अंत में रू. 5,91,871 को उपयोग में नहीं लाया जा सका और उस राशि को मंत्रालय को वापस लौटा दिया गया था. जैसा कि रसीदों और भुगतान की अनुसूचियों में बताया गया है, मंत्रालय के विभाग द्वारा नियुक्त अनुदान समिति (जीआईएसी) द्वारा अनुमोदित मूल परियोजना “अभिनव और प्रायोगिक शिक्षा कार्यक्रम” के अंतर्गत अनुदान के लिए स्कूल शिक्षा और साक्षरता प्रस्ताव (महाराष्ट्र के विद्यालयों के लिए केएचओएजे प्रोग्राम) के अनुसार, 7 बजट मदों के तहत खर्च किए गए थे. बजट मद: (1) परियोजना कर्मचारी की लागत (2) शिक्षा सामग्री का विकास / वितरण (3) एनडब्ल्यू स्टाफ का प्रशिक्षण (4) बच्चों के पुस्तकालय (5) बैठक / सेमिनार / कार्यशालाएं (6) बुनियादी सुविधा व्यय (7) प्रशासन व्यय

परियोजना के कर्मचारियों की लागत के तहत, मुंबई और महाराष्ट्र के स्कूलों में चल रही ‘खोज’ प्रोजेक्ट की परियोजना निदेशक के रूप में, तीस्ता सेतलवाड़ जी ने मानदेय के तौर पर पहले साल में प्रति माह रु. 20,000 और अंतिम वर्ष में प्रति माह रुपये 21,600 प्राप्त किए. प्रशासन व्यय के तहत, परियोजना प्रशासक के रूप में, जावेद आनंद जी ने भी पहले साल में रु. 20,000 मानदेय प्राप्त किया था ‘खोज’ परियोजना के अंतिम वर्ष में प्रति माह 21,600 रुपये लिए थे.

सबरंग ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में तीस्ता सेटलवाड़ जी और जावेद आनंद जी ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए एक रुपए भी नहीं लिया.

रईस खान द्वारा सेतलवाड़ जी को परेशान करने का एक संक्षिप्त विवरण

रईस खान को सीजेपी में एक लाभप्रद पद के साथ किराए पर आवास भी उपलब्ध कराया गया था. 2010 में सीजेपी के क्षेत्रीय संयोजक की नौकरी से निष्कासन के बत्तीस महीने पश्चात, खान ने हर मंच पर जा जा कर पहले तीस्ता सेतलवाड़ जी को बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ कई दुर्भावनापूर्ण और झूठे मामलों की चर्चा की और अफवाह फैलाई, इस से भी दिल नहीं भरा तो आनंद जी और सेतलवाड़ दोनों के खिलाफ अपनी मुहिम और तेज़ कर दी. सेतलवाड़ जी को पहली बार 2004 में गुजरात राज्य के विभागों के माध्यम से लक्षित किया गया था, जिसमे ज़ाहिरा शेख को उनके खिलाफ भड़काया गया था. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट ने सेतलवाड़ और सीजेपी को इन बेबुनियाद आरोपों से पूरी तरह से बरी कर दिया और ज़ाहिरा को प्रभावशाली राजनेताओं के द्वारा दिए प्रलोभन का दोषी पाया गया. जाहिरा शेख को 2006 में एक वर्ष की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी. सेतलवाड़ जी के खिलाफ आरोपों की श्रंखला में अपहरण और झूठी गवाही से लेकर अभी वाले वित्तीय गबन भी शामिल है.

जिस प्रकार आज दिल्ली सरकार के संरक्षण का लाभ उठाते हुए रईस खान को केन्द्रीय वक्फ बोर्ड में नियुक्त किया गया है, और उसके लिए वे वरिष्ठ वकील जुटाए गए हैं जिनकी निकटता सत्तारूढ़ दल के साथ है, इस से सरकार और रईस खान की सांठ-गांठ का षड्यंत्र साफ़ साफ़ उभर कर आता है. सितंबर 2010 के बाद से रईस खान एक न्यायाधिकरण के बाद दूसरे में जाकर जांच और न्याय की प्रक्रिया को बहकाने की कोशिश की. रईस खान अपनी हरकत से बाज़ ही नहीं आते, वे गुजरात के 2002 मामलों में विशेष तौर पर पांच अदालतों की सुनवाई में, नानावती शाह आयोग के समक्ष, एसआईटी और अब गुजरात पुलिस की अपराध शाखा तक जा पहुंचे हैं. सरदारपुरा मामले और नरोडा पाटिया मामले के दो फैसलों में, न्यायाधीशों ने रईस खान के आचरण पर न्यायालय के कामों में हस्तक्षेप करने की टिप्पणी तक की है.

स्पष्ट रूप से सीजेपी ने अपने सचिव, सेतलवाड़ के नेतृत्व में, 172 व्यक्तियों की सजा सुनिश्चित करवाई है – जिनमें 124 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. इस क्रूर और विनाशकारी शासन द्वारा उन्हें निशाने पर लिए जाने का यह एकमात्र कारण है. ज़किया जाफ़री मामले में जारी ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई, सत्ता में बैठे लोगों को शूल की तरह चुभ रही है.

रईस खान ने अब एक नई प्राथमिकी में, आधारहीन आरोपों की एक श्रृंखला बनाई है, जिसमें सेतलवाड़ जी और आनंद जी पर इलज़ाम लगाया है कि उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान के तहत अपने शिक्षा से जुड़े गैर सरकारी संगठन ‘खोज’ के लिए प्राप्त राशि को व्यक्तिगत प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि राशि का इस्तेमाल ऐसे सामग्री को छापने और बांटने के लिए किया जाता था जो सांप्रदायिक असंतोष फैलाने का कारण बन सकती थी. खान ने पहले सीबीआई द्वारा केस दर्ज कराने की कोशिश की, फिर एमएचआरडी में इस शिकायत को दर्ज करने का प्रयास किया. जब वहाँ काम नहीं बना तब अपराध शाखा में अपने सहयोगियों की सहायता से अपने लक्ष्य को प्राप्त किया.

अब तक, तीस्ता सेतलवाड़ जी, जो पिछले तीन दशकों से साहसी कामों द्वारा मानवाधिकार रक्षा कर रहीं हैं, आठ बार झूठे आपराधिक मामलों में अग्रिम जमानत की अर्जी दे चुकी हैं. उनकी निजी स्वतंत्रता को बाधित करना और कारागार की धमकी देना स्पष्ट रूप से इस शासन का पसंदीदा तरीका है. आनंद जी को भी, अबतक तीन बार झूठे मामलों में फंसाया जा चुका है.

इस उत्पीड़न पर सीजेपी का आधिकारिक विवरण यहां पढ़ा जा सकता है.

 

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