वाराणसी: देश की एकता और सद्भाव के लिए सत्संग और पदयात्रा यात्रा में "नफरत छोड़ो भारत जोड़ो", "नफरत मिटाओ संविधान बचाओ" के नारे लगाए गए

21, Sep 2022 | फ़ज़लुर रहमान अंसारी

दिनाँक 15 सितंबर 2022 को वाराणसी शहर और आसपास के नागरिक समाज की तरफ से शहर और देश में अमन व शांति के लिए सद्भावना यात्रा निकाली गयी। यह पदयात्रा भारत माता मंदिर से निकल कर भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की कब्र पर दुआ करते हुए कबीर मूल गादी कबीरचौरा मठ में समाप्त हुई।

यात्रा में “नफरत छोड़ो भारत जोड़ो”, “नफरत मिटाओ संविधान बचाओ” के नारे लगाए गए। पद यात्रा की समाप्ति पर सर्व धर्म प्रार्थना की गयी। सांप्रदायिक सद्भाव की पहल में इससे पहले विद्या आश्रम सारनाथ में लोक विद्या सत्संग कार्यक्रम रखा गया था।

 

सीजेपी का ग्रासरूट फेलोशिप प्रोग्राम एक अनूठी पहल है जिसका लक्ष्य उन समुदायों के युवाओं को आवाज और मंच देना है जिनके साथ हम मिलकर काम करते हैं। इनमें वर्तमान में प्रवासी श्रमिक, दलित, आदिवासी और वन कर्मचारी शामिल हैं। सीजेपी फेलो अपने पसंद और अपने आसपास के सबसे करीबी मुद्दों पर रिपोर्ट करते हैं, और हर दिन प्रभावशाली बदलाव कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इसका विस्तार करने के लिए जातियों, विविध लिंगों, मुस्लिम कारीगरों, सफाई कर्मचारियों और हाथ से मैला ढोने वालों को शामिल किया जाएगा। हमारा मकसद भारत के विशाल परिदृश्य को प्रतिबद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ना है, जो अपने दिल में संवैधानिक मूल्यों को लेकर चलें जिस भारत का सपना हमारे देश के संस्थापकों ने देखा था। CJP ग्रासरूट फेलो जैसी पहल बढ़ाने के लिए कृपया अभी दान करें

 

आयोजकों ने कहा कि यह सांस्कृतिक यात्रा बनारस की साझा संस्कृति और विरासत को संजोने के लिए निकाली गई है और आगे भी इसे चलाया जाएगा। यात्रा के दौरान सद्भावना, एकता, प्रेम से भरपूर गीतों, नारों और पर्चे के माध्यम से नगर के लोगों से अपील की गई कि आपसी प्रेम भाईचारे को नुकसान न होने दें और हिंसा भड़काने वाले किसी प्रचार भी से प्रभावित न हों। युवाओं को विशेष रूप से सोशल मीडिया और हिंसक प्रदर्शन या उकसाने वाली राजनीति से दूर रहने और झगड़ो विवादों से बचने की अपील की गई। मन्दिर मस्जिद के विवाद को भारत के संविधान की भावना और कानूनों के दायरे में हल करने के लिए राजनैतिक समझ और जिम्मेदारी दिखाने की भी मांग की गई। इस दौरान प्रेरणा कला मंच के कलाकारों ने सांस्कृतिक गीत गाए।

इस यात्रा में मुख्य रूप से प्रेरणा कला मंच के मुकेश, सन्दीप, सच्चिदानंद, सुजीत, अजय, साझा संस्कृति मंच से इंदु, जैक से धनजंय त्रिपाठी, अभिषेक, रोटी बैंक से आदिल, सिटीजन फ़ॉर डेमोक्रेसी से जागृति राही, स्वराज इंडिया से सतीश जी, बुनकर साझा मंच से फजलुर्रहमान अंसारी ,किसान मोर्चा से राम जनम जी, रिदम से डॉ अनूप, क्लाइमेट एजेंडा से रवि, आशा से प्रदीप, वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी से जावेद, और समाजवादी समागम से अरुण श्रीवास्तव शामिल हुए। यात्रा के अंत में हुई सर्व धर्म प्रार्थना में कबीर मठ में सन्त विवेक दास जी तमाम श्रद्धालुओं के साथ शामिल हुए।

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विद्या आश्रम सारनाथ में लोक विद्या सत्संग कार्यक्रम

सांप्रदायिक सद्भाव की पहल में इससे पहले दिनाँक 10 सितंबर 2022 को विद्या आश्रम सारनाथ पर लोक विद्या सत्संग कार्यक्रम के अंतर्गत एक गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसका विषय था, लोक विद्या एवं भाईचारा। लोगों ने विषय को स्पष्ट करते हुए कहा कि भाईचारा तो लोक विद्या समाज का प्राण है। भाईचारे के कारण ही लोक विद्या समाज जीवित है। बनारस में देखा जाए तो बनारसी साड़ी के कामों में हर धर्म जाति के लोग ताने-बाने की तरह जुड़े हुए हैं.. हिंदू देवी देवताओं का मुकुट बनाने का काम मुसलमान करते हैं यहां तक कि दुर्गा पंडाल भी मुसलमान कारीगर बनाते हैं। किसी भी धर्म के संस्थापक ने ऐसी कोई बात नहीं की जिससे दो संप्रदायों में टकराव हो, उन्होंने इंसानियत को पहला धर्म माना है जिसमें मानव मानव एक समान ना कोई हिंदू ना मुसलमान का संदेश मिलता है।

हम भारत माता की जय बोलते हैं इसका मतलब यह है कि भारत के लोग यहां के प्राकृतिक संसाधन यहां पर हो रहे कार्य सब की जय हो, केंद्रीय और प्रांतीय सत्ताएं स्थानीय सत्ताओं के साथ सहयोगी की भूमिका में आएं। स्थानीय सत्ताओं को स्वतंत्रता पूर्वक अपना कार्य करने दें, इससे आपसी भाईचारा मजबूत होगी और खुशहाली आएगी।

 

फ़ज़लुर रहमान अंसारी से मिलें

Fazlur Rehman Grassroots Fellow

एक बुनकर और सामाजिक कार्यकर्ता फजलुर रहमान अंसारी उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले हैं। वर्षों से, वह बुनकरों के समुदाय से संबंधित मुद्दों को उठाते  रहे हैं। उन्होंने नागरिकों और कुशल शिल्पकारों के रूप में अपने मानवाधिकारों की मांग करने में समुदाय का नेतृत्व किया है जो इस क्षेत्र की हस्तशिल्प और विरासत को जीवित रखते हैं।

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