Dalit Forest Rights Activist Shobha demands action against minor son’s Illegal Detention Alleges constant harassment from authorities

08, Jan 2018 | Sushmita

Shobha, a resident of village Baadi, post Daala, and district Sonebhadra, is one of the key women leaders of the ongoing people’s movement in the Sonebhadra district against the illegal construction of the Kanhar dam. She is also part of the movement to implement the Forest Rights Act, 2006. She has now alleged that she is being consistently harassed by the police. Shobha alleged in her complaint letter, dated December 24, 2017 addressed to the Police Superintendent, that the Chopan police picked her minor son on December 22, 2017 on fabricated charges without proper investigation and beat him up in the police station.

In September 2017, Justice PB Sawant, Justice Kolse Patil and human rights activist, journalist and educationist Teesta Setalvad wrote a letter to the District Magistrate, Pramod Kumar Upadhyay of the Lodhi village in district Sonebhadra, Uttar Pradesh (UP) urging that senior officers of the police and administration look into all the alleged false and frivolous cases and serious charges put by the administration against Adivasi and Dalit women leaders of Sonebhadra and their union leader Ms. Roma. However, the local administration has continued exploiting the community and especially the women leaders of the area.

Shobha alleged in the letter that the police has been continuously harassing her for many years. On December 22, 2017 at around 7 pm, when Shobha’s 15 year old son Suraj, along with his elder brother Ravi was returning after the day’s work, he was allegedly caught by the temple priest Shrikant, the temple shopkeeper Munna and one more person, Rajesh. All of them charged upon Suraj saying that he has stolen a mobile and an amount of Rs. 6000. Suraj kept pleading that he knew nothing about the mobile or the money, but Shrikant dialed 100 and called the police.

Shobha kept pleading to the policemen that only after investigation can Suraj’s crime be ascertained and that there is no justification for picking up a minor in this manner. But the police did not pay heed to Shobha’s requests and took him to the police station in the night itself. Reportedly, Suraj was beaten in the police station on the instructions of the Station In-charge and the S.O. The police allegedly stepped upon him and kicked him on his cheeks and thighs and they forced him to make a confession about the crime. The police allegedly abused Shobha and her daughter in front of Suraj.

Shobha alleges in the letter that she is aware that this has been done to her in a spirit of revenge as the contractors and local goons do not want her to organise “The poor people in the area on issues of women’s rights, forest rights and land rights.” Shobha mentioned in the letter that she is a national level member of All India Union for Forest Working People (AIUFWP) working on the rights of forests working people since 2006.

After this incident, Shobha reached the police station early next morning with other Dalit and Adivasi women to talk to the S.O. Reportedly, the police misbehaved with the women and did not let them enter. The station In-charge snapped his fingers and asked them, “Go away, why do prostitutes need to come to the station?” Shobha said that her son was innocent and if the police does not leave him then the women will not leave the station. Noticing the women outside the station, other people started gathering. On seeing this, the police got apprehensive and S.O. Mr. Chopan gave orders to Station In-charge for Suraj’s release. They left Suraj by morning 9 am.

Shobha said in the letter that though the police was aware that Suraj is innocent, they detained him illegally and kept a minor in the police station. This was clearly against D.K. Basu guidelines. She added that though she is a poor woman, she has to face such harassment by police and goons frequently. Despite having written to the district collector on several occasions, the harassment has not stooped. Shobha has demanded a high level inquiry into this matter alleging illegal detention of a minor all night in the police station, physical torture, usage of abusive language against women and specifically the derogatory remarks against Shobha and her daughter. She demanded that the station In-charge and S.O. should be immediately suspended from their duties and responsible and sensitive police officers should be placed in place of them.

A copy of the letter is reproduced below:

उप महासचिव
अखिल भारतीय वनश्रमजीवी यूनियन
दिनांक: 24 दिसम्बर 2017
सेवा में
श्रीमान पुलिस अधीक्षक
जिला सोनभद्र
विषय: प्रार्थीनी के 15 वर्षीय नाबालिग पुत्र को चोपन पुलिस द्वारा मारपीट व झूठे अरोप में थाने में रात भर निरूद्ध करने के सम्बन्ध में।
महोदय ,
प्रार्थीनी शोभा पत्नि राम गरीब निवासी ग्राम बाड़ी , पो0 ड़ाला वैष्णो मंदिर के पास, एक अनुसूचित जाति की महिला है। पिछले कई वर्षों से प्रार्थीनी को गांव के दबंग व पुलिस द्वारा मिली भगत कर उत्पीड़न  किया जा रहा है। दिनांक 22-12-2017 को रात 7 बजे प्रार्थीनी के पुत्र सूरज जो कि 15 वर्ष का नबालिग बच्चा है को मंदिर के पंड़ित श्रीकांत, मंदिर के दुकानदार मुन्ना और राजेश द्वारा अचानक मंदिर के सामने पकड़ लिया, जब सूरज और प्रार्थीनी का बड़ा बेटा रवि सगड़ी ठेला लेकर मजदूरी करते हुए घर वापिस लौट रहे थे। उनपर झूठा अरोप लगाया कि सूरज ने मोबाईल व 6000 रू चुराये हैं । सूरज लगातार यह कहता रहा कि उसे मोबाईल और रुपये के विषय में कुछ भी नहीं मालूम है लेकिन पंड़ित श्रीकांत ने 100 न0 पर फोन कर पुलिस को बुला लिया । बिना जांच और पड़ताल किये सूरज को पुलिस द्वारा मारा पीट कर थाने ले जाया गया । प्रार्थीनी को जब पता लगा तो वह कहती रही कि तहकीकात होने के बाद ही सूरज पर अरोप सिद्ध हो सकता है और दूसरे रात को नबालिग बच्चे को थाने पर ले जाने का कोई औचित्य नहीं है । लेकिन पुलिस ने प्रार्थीनी की एक न सुनी और सूरज को रात में ही थाने ले जाया गया । थाने में चैकी इंचार्ज और एसओ के निर्देश पर सूरज को काफी मारा पीटा गया । गाल पर और उसकी जांघो पर चढ़ कर उससे जुर्म कबुलवाने की कोशिश की गई  सूरज डर के मारे रोता रहा और डर के मारे उससे कबुलवाया गया कि वो चोर है । पुलिस वाले ने उसे यहां तक कहा कि तुम्हारी बहनें रंडी है जो धंधा कर के घर को चलाती है और तुम चोरी करके अपनी मां शोभा को पैसा देते हो । सूरज के सामने उसकी मां और बहनों को पुलिस वालों ने गंदी-गंदी गालियां दी। पुलिस ने सूरज के खिलाफ पूरी तहरीर तैयार कर जेल भेजने की तैयारी कर ली थी । लेकिन प्रार्थीनी को मालूम था कि उसके बेटे को रंजीशन झूठे अरोप में फसाने की कोशिश की जा रही है चूंकि गांव के दबंग नहीं चाहते कि प्रार्थीनी गांव में महिला अधिकारों , वनाधिकार व भूअधिकार के उपर गरीब जनता को संगठित करे । प्रार्थीनी एक राष्ट्रीय संगठन अखिल भारतीय वनजन श्रमजीवी यूनियन की सक्रीय सदस्य है जो कि पिछले एक दशक से वनाधिकार कानून 2006 के तहत अपने भूअधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है ।
सुबह होते ही प्रार्थीनी कुछ आदिवासी व दलित महिलाओं को लेकर थाने में एसओ से बात करने गई । पुलिस द्वारा महिलाओं से बहुत बदतमीजी से बात की गई और अंदर नहीं आने दिया । चैकी इंचार्ज द्वारा चुटकी बजाते हुए प्रार्थीनी से कहा कि भाग यहां से क्या लेने आई है, रंड़ियों का थाने में कोई काम नहीं है ’।
प्रार्थीनी ने अपने बेटे की बेगुनाही पर बोला और कहा कि अगर नहीं छोंड़ेगे तो महिलायें थाने से नहीं जायगी । बाहर महिलाओं को देख थाने के आसपास लोग इकठ्ठा होना शुरू हो गये। इसे देख पुलिस वाले डरे व एसओ चोपन ने चैकी  इंचार्ज को सूरज को छोड़ने का निर्देश दिया । सुबह 9.00 बजे चैकी इंचार्ज द्वारा सूरज को स्वयंम घर पर छोड़ा गया।
महोदय, सूरज पर सभी अरोप झूठे थे इसे पुलिस अच्छी तरह जानती है लेकिन इसके बावजूद भी नबालिग बच्चे को रात भर पुलिस द्वारा थाने में निरूद्ध किया गया । यह सरासर गैरकानूनी है और डी0 के बासू गाइडलाईन के खिलाफ है । प्रार्थीनी एक गरीब महिला है जिसे आए दिन दबंगो और पुलिस से प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है । इस विषय में जिलाधिकारी महोदय को कई बार पत्र दिया जा चुका है लेकिन अभी तक यह उत्पीड़न नहीं रूक रहा है ।अतः प्रार्थीनी की यह मांग है कि इस मामले की फौरन उच्च स्तरीय जांच की जाये। नबालिग बच्चे को रात में अवैध तरीके से थाने में निरूद्ध करने , मारपीट, गाली गलौच करने , महिलाओं के साथ अभद्र भाषा , गाली गलौच करने व प्रार्थीनी एवं उसकी पुत्रियों को अपशब्द कहने के लिए चैकी इंचार्ज व एसओ को निलंबित किया जाये व थाने में अच्छे पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाये ।
ग्राम बाड़ी, पोस्ट डाला
थाना चोपन
जिला सोनभद्र
उत्तर प्रदेश
1. जिलाधिकारी सोनभद्र
2. क्मीशनर मिर्जापुर
3. आईजी वाराणसी
4. डीजीपी लखनउ
5. मुख्यमंत्री उ0प्र0 सरकार, लखनउ


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