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Citizens for Justice and Peace

चंद्रशेखर आज़ाद को रिहा करो अभी इस याचिका पर हस्ताक्षर करें

04, May 2018 | CJP Team

भीम सेना प्रमुख, चंद्रशेखर आज़ाद की रिहाई और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका या NSA) के आरोपों को खारिज करने के लिये CJP ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक याचिका तैयार की है. हमने उनसे अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द चंद्रशेखर आज़ाद को जेल से रिहा करें. हम आपसे भी विनम्र निवेदन करतें हैं कि आप भी इस याचिका पर हस्ताक्षर कर CJP के अभियान का समर्थन करें.

चंद्रशेखर आज़ाद, जो ‘रावण’ के नाम से सुप्रसिद्ध हैं, कई महीनों से जेल की सलाखों के पीछे क़ैद हैं. हालांकि उन्हें २७ मामलों में बेल मिल गयी है, उन्हें अभी भी रासुका के अंतर्गत कारावास में रखा जा रहा है. हमारी याचिका पढ़ने और उस पर हस्ताक्षर करने के लिए नीचे दी गयी छवि पर क्लिक करिए.

आप हमारी याचिका का हिंदी अनुवाद यहाँ पढ़ सकते हैं –

योगी आदित्यनाथ,
माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश राज्य,
लखनऊ, यूपी – 226003

विषय: भीम सेना प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की हिरासत के विस्तार के संबंध में

श्रीमान,

हम सिटिज़न फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी), एक नागरिक अधिकार संगठन, की ओर से एक जरूरी और अति आवश्यक बात पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं. सीजेपी के अलावा न्यायमूर्ति बीजी कोल्से पाटिल (सेवानिवृत्त न्यायाधीश बॉम्बे उच्च न्यायालय) और न्यायमूर्ति पी.बी. सावंत (निवृत्त न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया), प्रदीप नरवाल (संयोजक, भीम सेना रक्षा समिति) भी इस आवश्यक याचिका के हस्ताक्षरकर्ता हैं.

यह मामला भीम सेना के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण, एक युवा और गतिशील लोकतांत्रिक अधिकार कार्यकर्ता, के अन्यायपूर्ण कारावास से संबंधित है. उन्हें 9 जून, 2017 को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले हैं, जो हमें यकीन हैं कि अन्यायपूर्ण तरीके से लगाये गये है, उनके अलावा नवंबर 2017 के बाद से उन पर कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) भी लगाया गया है.

अब, हमारी निराशा को और बढ़ाते हुए, हमें  ज्ञात हुआ है कि 23 जनवरी, 2018 को पारित एक चौंकाने वाले आदेश के माध्यम से, उत्तर प्रदेश सरकार ने उक्त अधिनियम की धारा 12(1) के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) कि अवधि और बढ़ा दी है. 2 मई 2017 से 6 माह के लिए उनकी हिरासत की अवधि बढ़ा दी गई है जिसका अर्थ है कि उन्हें मई 2018 तक हिरासत में रखा जाएगा. आदेश के अनुसार ‘बोर्ड पर सभी सबूतों पर विचार के बाद’ और सलाहकार बोर्ड (हिरासत) की सलाह पर नजरबंदी की अवधि को वैकल्पिक रूप से विस्तारित किया जा रहा है. इन सारे तथ्यों के अलावा, वे सहारनपुर जेल में हैं जबकि उनकी स्वास्थ्य और सुरक्षा चिंताजनक स्थिति में है.

इसका यह भी मतलब है कि हिरासत इस अवधि के बाद भी बढाई जा सकती है. चिन्ताशील नागरिकों के तौर पर हम यह जानना चाहते है कि ऐसे कौन से साक्ष्य हैं जिनके आधार पर इस क्रूर धारा के तहत यह हिरासत बढाई गई? जबकि उनके खिलाफ ना कोई नया मामला आया ना कोई इलज़ाम लगा. उनको अबतक 27 मामलों में ज़मानत मिल चुकी है. आज का दिन लेते हुए अब तक उनको जेल में आठ महीने हो चुके हैं. (उनकी गिरफ्तारी जून 8, 2017 को हुई थी). महोदय, इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि ये आदेश तब आया है जब उनको जनवरी 2018 में बाकी मामलों में भी ज़मानत मिल चुकी थी और वे जेल से रिहा होने वाले थे.

आर्मी रक्षा समिति के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप नरवाल के मुताबिक हमको यह भी डर है कि उनकी जान खतरे में है. जनवरी 25, 2018 को प्रदीप नरवाल ने आजाद से मुलाक़ात की. यदि उनके स्वस्थ्य को कोई भी क्षति पहुचती है तो आदेश के सारे हस्ताक्षरकर्ताओं यानि गृह मंत्रालय, उत्तर प्रदेश राज्य और गृह मंत्रालय के अलावा भारत सरकार भी ज़िम्मेदार होगी.

चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ दर्ज मामलों की पृष्ठभूमि हम आपको याद दिलाना चाहेंगे. मई 5, 2017, को शब्बीरपुर और रामपुर गाँव में दलित समुदाय के खिलाफ हिंसा फूटी जब उन्होंने महाराणा प्रताप के जन्म-अवसर पर ठाकुरों द्वारा निकाली जाने वाली शोभा यात्रा का विरोध किया. दलितों का यह कहना था कि वह यात्रा निकालने की इजाज़त नहीं ली गई थी. इस घटना में दलितों के 60 घर आग के हवाले कर दिए गए.

मई 9, 2017 को भीड़ का गुस्सा तब फूटा जब शब्बीरपुर गाँव में पुलिस ने भीम सेना के नेतृत्व में गाँधी मैदान में शांतिपूर्वक धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया. इस हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए. लाठी चार्ज के पश्चात, भीड़ द्वारा की गई हिंसा निंदनीय है, मगर यह भी बताना ज़रूरी है कि इस हिंसा में ना तो किसी की जान गई न कोई गंभीर रूप से घायल हुआ. इस हिंसा के पश्चात सहारनपुर में भीम सेना के सदस्यों को बिना वाजिब कारणों के प्रताड़ित किया जा रहा है. जून 2017 से हिरासत में रहने के बावजूद, नवम्बर 1, 2017 को पहली बार एनएसए लगायी गई. जबकि आज़ाद पहले से ही हिरासत में हैं, उनपर एनएसए लगाना साबित करता है कि ये कदम सिर्फ उन्हें रिहा होने से रोकने के लिए उठाया गया है.

मई 13, 2017, वरिष्ट न्यायमूर्तियों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के पत्र के मुताबिक विरोध प्रदर्शन में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसके कारण एनएसए लगाया जाता.

न्यायमूर्ति पी.बी. सावंत (निवृत्त, सर्वोच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति बीजी कोल्से पाटिल (सेवानिवृत उच्च न्यायालय न्यायाधीश), जस्टिस हॉस्बेट सुरेश (सेवानिवृत उच्च न्यायालय न्यायाधीश), तीस्ता सेतलवाड़ , सचिव, सीजेपी

प्रदीप नरवाल (संयोजक, भीम सेना रक्षा समिति), राम पुन्यानी, लेखक और कार्यकर्ता, जावेद आनंद, पत्रकार और कार्यकर्ता, सीजेपी, मुनीज़ा खान, विद्याविद् और कार्यकर्ता, खालिद अनीस अंसारी, विद्याविद् और  पसमांदा डेमोक्रेटिक फोरम के नेता पहले ही इस याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं.

एनएसए जो राज्य और केंद्र सरकार को धारा 3(1)(a),(b),(2),(3)(4),(5) के तहत असाधारण अधिकार देता है कि वो देश और राज्य की सुरक्षा के हित में कुछ लोगों को हिरासत में ले सकती हैं मगर इसका उपयोग सावधानी पूर्वक यथोचित आधार पर होना चाहिए.

चंद्रशेखर के मामले में उसने ऐसा कोई भी कृत नहीं हुआ जो राज्य की सुरक्षा को खतरे में डाले बल्कि वे देश के नागरिक होने के नाते अपने लोकतांत्रिक और संविधानिक अधिकारों को इस्तेमाल कर रहे थे. वास्तव में, यहां उनके नेतृत्व के तहत भीम सेना द्वारा किया जा रहा अनुकरणीय कार्य की ओर ध्यान आकर्षित करना महत्वपूर्ण होगा. भीम सेना ग़रीब और दलित बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रही है, उन्होंने 350 स्कूल शुरू किये जिनको पिछले 9 महीनों में जबरन बंद करवा दिया गया है. दो ऐसे स्कूल आज भी उनके गाँव शब्बीरपुर, उत्तर प्रदेश में आजाद के घर में चलाये जा रहे हैं.

उपरोक्त तथ्यों की रौशनी में, हम माँग करतें हैं कि चंद्रशेखर आज़ाद के खिलाफ एनएसए के तहत लगाये सारे मामले ख़त्म किये जाये और उन्हें तुरंत ज़मानत पर रिहा किया जाये. हम आग्रह करते हैं कि उनके बिगड़ते स्वास्थ की भी खबर ली जाये.

हम आपसे त्वरित और विस्तारित दखल का आग्रह करते हैं.

सादर,

न्यायमूर्ति पी.बी. सावंत (निवृत्त, सुप्रीम कोर्ट जज)
न्यायमूर्ति बीजी कोल्से पाटिल (सेवानिवृत उच्च न्यायालय न्यायाधीश)
जस्टिस हॉस्बेट सुरेश (सेवानिवृत उच्च न्यायालय न्यायाधीश)
तीस्ता सेतलवाड़ , सचिव, सीजेपी
प्रदीप नरवाल (संयोजक, भीम सेना रक्षा समिति)
राम पुन्यानी, लेखक और कार्यकर्ता
जावेद आनंद, पत्रकार और कार्यकर्ता, सीजेपी
मुनीज़ा खान, विद्याविद् और कार्यकर्ता
खालिद अनीस अंसारी, प्रोफेसर, ग्लोकल विश्वविद्यालय, सहारनपुर

 

प्रतिलिपि: 1. अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू,
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
ईमेल: [email protected]
[email protected]

2. श्री राजनाथ सिंह
गृह मंत्रालय
भारत सरकार
ई-मेल: [email protected]

चंद्रशेखर आज़ाद की रिहाई के लिए देखिये हमारी विडियो अपील –

((*यह याचिका सर्वप्रथम १ फरवरी २०१८ को प्रकाशित की गयी थी.))

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