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Citizens for Justice and Peace

Adivasi

वनाधिकार क़ानून २००६ प्रशिक्षण सामुदायिक दावे और इन्हें दायर करने के अलग अलग चरण

CJP और AIUFWP द्वारा प्रस्तुत, यह वीडियो, वन अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण के लिए है। इसका उद्देश्य वन श्रमिकों को और जमीनी स्तर पर वनाधिकार के लिए काम करने वालों को, सामुदायिक दावों के बारे में जानकारी देना है, ताकि FRA दो हज़ार छे को प्रभावी ढंग से पूरे देश में लागू किया जा सके। इस…

वनाधिकार क़ानून २००६ प्रशिक्षण भाग ३ सामुदायिक दावे और इन्हें दायर करने के अलग अलग चरण

CJP और AIUFWP द्वारा प्रस्तुत, यह पॉडकास्ट, वन अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण के लिए है। इसका उद्देश्य वन श्रमिकों को और जमीनी स्तर पर वनाधिकार के लिए काम करने वालों को, सामुदायिक दावों के बारे में जानकारी देना है, ताकि FRA दो हज़ार छे को प्रभावी ढंग से पूरे देश में लागू किया जा सके। भाग…

वनाधिकार क़ानून २००६ प्रशिक्षण भाग २ पॉडकास्ट में समझें संविधान और वन अधिकार

CJP और AIUFWP द्वारा प्रस्तुत, यह पॉडकास्ट, वन अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण के लिए है। इसका उद्देश्य वन श्रमिकों को और जमीनी स्तर पर वनाधिकार के लिए काम करने वालों को, सामुदायिक दावों के बारे में जानकारी देना है, ताकि FRA 2006 को प्रभावी ढंग से पूरे देश में लागू किया जा सके। भाग दो में जानी…

वनाधिकार क़ानून २००६ प्रशिक्षण भाग १ पॉडकास्ट में सुनिए FRA क़ानून बनाने की पृष्ठभूमि

CJP और AIUFWP द्वारा प्रस्तुत, यह पॉडकास्ट, वन अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण के लिए है। इसका उद्देश्य वन श्रमिकों को और जमीनी स्तर पर वनाधिकार के लिए काम करने वालों को, सामुदायिक दावों के बारे में जानकारी देना है, ताकि FRA 2006 को प्रभावी ढंग से पूरे देश में लागू किया जा सके। भाग एक में सुनिए…

This is the land of our ancestors: Adivasi man writes to CJP Bihar man recounts abuse inflicted by Forest Department

“We are fighting the Forest Department for our right to the water, the forests and the land. We say that all of this [forests] is ours and shall remain ours. This forest is our livelihood. This is our ancestor’s land. We have been living here forever,” said 65-year-old Adivasi, Ram Surat Singh. However, the frustrated…

जल, जंगल, जमीन हमारा था, है और हमारा ही रहेगा – राम सूरत सिंह बुजुर्ग आदिवासी की जुबानी, वन विभाग के उत्पीड़न की कहानी

आदिवासी अपनी जल, जंगल जमीन को बचाने की जद्दोजहद में निरंतर जुटे हैं। बिहार के अधौरा के बरडीह गांव निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी राम सूरत सिंह ने अपनी पीड़ा CJP के साथ शेयर की है। इस दौरान उन्होंने बड़े ही मार्मिक तरीके से बताया कि वे अपनी आजीविका चलाने के लिए किस तरह का…

Legal muscle to defend Forest Rights Day 2 of CJP webinar sheds light on laws and their implementation

Day 2 of the CJP webinar titled Forest Rights Movement and Covid-19 saw a more in-depth discussion on the law and how its lax implementation had left millions of forest dwellers vulnerable. The webinar started with a beautiful song by the Adivasi women from Tharu tribe of Lakhimpur Kheri district of Uttar Pradesh about the struggle of the villagers of Kajaria.…

आवाम और ग्राम सभा का सशक्तिकरण इस टूलकिट का उद्देश्य समुदाय का वनों पर स्व-शासन के संवैधानिक अधिकार को मज़बूत करना है।

गांधी जयंती के दिन ग्राम सभा प्रस्ताव लिखने के लिए हम एक टूलकिट “आवाम की सत्ता, ग्राम सभा  की सत्ता” जारी कर रहे हैं। गांधीजी ने कहा था – “स्वतंत्रता, शक्ति और आत्मनिर्भरता से आती है”। यहां ‘आत्मनिर्भरता’ का मतलब हाशिए पर रह रहे लोगों का शोषण कर व्यवसायों और पूँजी के हितों को बढ़ावा देना नहीं…

CJP-AIUFWP move NHRC against firing on peaceful Adivasi protesters in Kaimur Many protesters were also arrested, their demands fell on deaf ears

In a shocking display of impunity and abuse of power, the Bihar Police fired at and wrongfully arrested Adivasi activists of Kaimur Mukti Morcha on September 11, 2020 during a sit-in demonstration demanding land, forest and water in Kaimur. Now, CJP and the All India Union of Forest Working People (AIUFWP) have brought to the…

वनाधिकार कानून की बात करनी है तो गोली खाने को रहे तैयार! वे डरते हैं कि इक दिन निहत्थे और ग़रीब लोग उनसे डरना बंद कर देगें

बिहार के इस चुनावी माहौल में जिला कैमूर के अधौरा प्रखंड़ में अपने जल, जंगल और ज़मीन के हक़ों के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासीयों पर पुलिस द्वारा बरबर गोलियां बरसाई गई। 11 सितंबर 2020 को पुलिस और वन विभाग ने निहत्थे आदिवासीयों पर गोली चालन किया जिसमें 3 लोग घायल हो गए और काफी…

CJP webinar on Forest Rights: Testimonies from Grassroot Activists In Part 3 of our report on the CJP webinar, activists strike a hopeful chord

In the concluding part of Day 1 of CJP’s webinar, grassroot activists, many of whom work closely with our partner organisation All India Union of Forest Working People (AIUFWP) shared stories of small victories that helped end the day on an upbeat note. Nivada Rana: We have been facing oppression since the days of my…

RajKumari Bhuiya

पितृसत्ता को चुनौती देती एक आदिवासी राजकुमारी कहती हैं कि वो एक माई (मां) हैं और धरती (जमीन) भी माई - इसमें पितृसत्ता कहां से आई?

पितृसत्ता, सिर्फ पुरुषों द्वारा महिलाओं के खिलाफ की गई यौन हिंसा भर नहीं है बल्कि एक ऐसी व्यवस्था है जो महिलाओं के जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करती है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक। यहां तक कि उनकी कोख तक को नियंत्रित करती है। लेकिन पितृसत्ता का प्रभाव इतना भर नहीं है। इसमें हर…

Struggle for Forest Rights in India stretches from East to West Part-2 of CJP’s webinar reveals how grassroot activists from West Bengal to Maharashtra still struggle for Forest Rights

In the second leg, CJP and AIUFWP’s webinar titled Forest Rights Movement and Covid-19, moved from Uttar Pradesh and Uttarakhand to other parts of the country. Grassroot activists from West Bengal, Odisha, Madhya Pradesh and Maharashtra joined moderator and CJP secretary Teesta Setalvad to share stories of how they continued a peaceful struggle for forest rights,…

Forest Rights and Covid-19: Through the eyes of UP and Uttarakhand grassroot activists Part-1 of CJP’s webinar reveals how authorities are abusing their power to usurp rights of forest dwellers

On August 7 and 8, 2020, Citizens for Justice and Peace (CJP) and All India Union of Forest Working People (AIUFWP) conducted a two-day webinar titled Forest Rights Movement and Covid-19. The objective of this unique initiative was to provide a platform to forest rights defenders to share how officials of the forest department, police force…

Covid-19 disproportionately affecting Indigenous people: UN OHCHR issues guidance on protection of Indigenous Rights during the pandemic

Indigenous communities, who often lack access to proper healthcare facilities, on account of a history of oppression and discrimination, are also suffering disproportionately due to the Covid-19 pandemic as per the United Nations. A guidance released by the Office of the Human Rights Commissioner, titled Covid-19 and Indigenous People’s Rights, says, “The COVID-19 pandemic is…

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