Menu

Citizens for Justice and Peace

Agrarian Rights

भारत में किसानों, कृषि श्रमिकों और वन श्रमिकों के अधिकार सामुदायिक संसाधन

भारत की अर्थव्यवस्था हमेशा से देश भर में फैली नदियों के संजाल और उपजाऊ मिट्टी की प्रचुरता के कारण मुख्य रूप से कृषि प्रधान रही है. पंजाब में गेहूं के स्वर्णिम मैदानों से, गंगा और इसकी सहायक नदियों के बाढ़ के मैदानों में मक्का, बाजरा और दालों के जलोढ़ लहलहाते विशाल कृषि क्षेत्र तक, दार्जिलिंग…

मुंबई के बाद लखनऊ में किसानों का आक्रोश देश भर के किसानो में फैल रही है सरकार के खिलाफ़ नाराज़गी

नासिक से मुंबई long march ऐतिहासिक रैली के बाद, देश के कोने कोने में किसान आक्रोश फैल रहा है. लखनऊ के विशाल किसान प्रतिरोध रैली मे AIKS के नेताओं ने और किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी मांगे मानी जायें वरना आन्दोलन नहीं रुकेगा.   Related: आत्महत्या नहीं संघर्ष करेंगे

‘आत्महत्या नहीं संघर्ष करेंगे’: किसान प्रतिरोध का नया नारा उत्तर प्रदेश में किसानों की विशाल रैली का आयोजन

उत्तर प्रदेश किसान सभा के बैनर तले १५ मार्च को लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में विशाल ‘किसान प्रतिरोध रैली’ का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के कोने-कोने से आये हजारों किसानों ने ‘आत्महत्या नहीं संघर्ष करेंगे’ की हुंकार भरी। किसानों ने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव, तहसीलों, जिला मुख्यालयों और विधान सभा तक चरणबद्व…

Rights of Farmers, Agricultural Labourers and Forest Workers in India Community Resource

India has always been a predominantly agrarian economy give the abundance of rivers and fertile soil across the country. From the golden fields of wheat in Punjab, to maize, millet and pulses thriving in the alluvial rich vast agricultural expanse of the flood plains of the Ganga and its tributaries, to the lush paddy fields…

Kisan Long March ends with Fresh Promises to Farmers Protest called off as government agrees to look into all demands

In a possible relief to farmers and Adivasis from across Maharashtra who had gathered in Mumbai demanding basic rights, the Maharashtra Government has agreed to look into and address their basic demands. Over 30,000 farmers and Adivasis started the Kisan Long March from Nashik on March 6 and covered a distance of nearly 200 kilometers before reaching…

Suhel Bannerjee

भूमि अधिग्रहण कानून, २०१३ में बदलाव – एक समीक्षा

मुंबई-नागपूर समृद्धी महामार्ग निर्माण के लिये जरुरी जमीन अधिग्रहण में किसानों के उग्र विरोध के चलते पूरी प्रक्रिया में रुकावट पैदा हो गई है. इससे फिर एक बार जमीन अधिग्रहण का मुद्दा सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन रहा है. स्वतंत्रता के पश्चात, सरकार ने विकास हेतु नियोजन के रास्ते को चुना. इसके तहत कृषी क्षेत्र…

Go to Top