भड़काऊ भाषण रोकने के लिए किस तरह करें एफ़.आई.आर. दर्ज नफरत के खिलाफ़ कदम उठाइए

13, Jan 2018 | Teesta Setalvad

पिछले कुछ दिनों से यह संकेत आ रहे हैं कि कुछ राज्य अपने संवैधानिक कर्तव्य के प्रति जागृत हुए हैं, वे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ घातक भगवा एजेंडा के तहत ज़हरीले भाषणों के द्वारा व्यवस्थित रूप से फैलाई जाने वाली नफरत,जो किसी भी हिंसा की शुरुत होती है, को रोकने का प्रयास करेंगे. इस संबंध में चिन्ताशील नागरिकों और समूहों द्वारा एक देशव्यापी कार्रवाई ही इस नफरत के बढ़ते उद्योग पर लगाम लगा सकती है.

आप सीआरपीसी की धारा 154 के तहत एक स्थानीय पुलिस थाने पर पंजीकृत करके प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं. यदि पुलिस अधिकार-क्षेत्र को लेकर बहस करती है (कानून के तहत घृणास्पद भाषण या लेखन को बताते हुए देरी करती है), तो कानून के तहत, आप लिख सकते हैं कि इन शब्दों को सुनकर या मीडिया में / एक पुस्तिका में या टेलीविजन पर, आप इसके द्वारा आहत हुए हैं और इसलिए इसे वहां दर्ज कराना चाहते हैं. सबसे बुरी स्थिति में, अगर पुलिस आपको मना करती है तो आप सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एक स्थानीय मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं.

द सिटीजन्स ऑफ़ जस्टिस एंड पीस मुंबई और मुंबई के अन्य चिन्ताशील नागरिकों ने 2003 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय में घृणास्पद भाषण को रोकने के उद्देश्य से याचिका दायर की थी. सर्वोच्च न्यायालय ने दो आरोपियों- गुजरात के मुख्यमंत्री, नरेंद्र मोदी, और वीएचपी के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल को नोटिस जारी किए गए थे. अदालत ने गुजरात, महाराष्ट्र (जहां शिकायत दर्ज की गई थी) और पंजाब (जहां सिंघल ने ज़हरीला भाषण दिया था) की सरकारों और इन राज्यों के पुलिस महकमे को यह जांच करने के लिए निर्देश दिया कि क्या अपराध किए गए थे?” और अदालत ने इस पर रिपोर्ट तलब की थी. उसके बाद सर्वोच्च न्यायलय ने निचली अदालत को कार्रवाई का निर्देश दिया परंतु दुर्भाग्यवश, सीधे एफआईआर के पंजीकरण करने के आदेश नहीं दिया गया.

नफरत को रोकिये कुछ इस तरह

घृणात्मक भाषण और लेखन के संबंध में नागरिकों और कार्यकर्ताओं को लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता है. कम्युनलिस्म कॉम्बैट  के कई पाठक एस विषय से अवगत होंगे कि, इस तरह के दुरुपयोग के खिलाफ कानून हैं जो दोषपूर्ण हैं,लेकिन हमें इन्हें लागू करने की आवश्यकता है, और इसका प्रयोग करें ताकि उनके सुधार और संशोधन के लिए निरंतर अभियान चलाया जा सके.

घृणास्पद भाषण पर काम करने की ओर पहला कदम सावधान रहना है, ताकि इस तरह के भाषण के पूरे पाठ पर नज़र बनाये रखें / टेप / वीडियो टेप किया जा सके. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के धारा 153ए और 153बी  इस तरह के उल्लंघन के दोषी लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए राज्य को बाधित करते है. सीआरपीसी की धारा 295 भी एक ऐसा खंड है जिसे सांप्रदायिक सौहार्द को बाधित करने के लिए जानबूझकर प्रयास किए जाने पर लागू किया जा सकता है.

उसके बाद, प्राथमिकी (एफ.आई.आर.) दर्ज कराना आवश्यक है. अपराध रिपोर्ट होने पर पुलिस भले ही एफ.आई.आर. करने के लिए बाध्य है, परन्तु अनुभव बताता है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में पुलिस एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करती है और न ही जांच शुरू करती है, जब तक कि इसमें स्पष्ट राजनीतिक निर्देश न हो. इसलिए चिन्ताशील नागरिकों या संगठनों के लिए एक शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है (या तो व्यक्तिगत तौर पर या पंजीकृत डाक द्वारा) और उसके बाद, अगर पुलिस कार्यवाही करती है, तो अदालतों से संपर्क कर उन्हें हरकत में आने के लिए निर्देश प्राप्त किये जा सकते हैं.

नीचे शिकायत दर्ज कराने का पुनर्निर्मित प्रारूप है जो द सिटीजन्स ऑफ़ जस्टिस एंड पीस, मुंबई और अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा उपयोग में ला गयी है -:

 

यह संसाधन मूल रूप से कम्युनल कॉम्बैट के अप्रैल 2003 के अंक में प्रकाशित हुआ था. हम इसे संशोधित रूप में पुनः प्रकाशित कर रहे हैं.

 

दंड संहिता और भड़काऊ भाषण

दंड संहिता की धारा 153 (क) के अनुसार

जो कोई भी धर्म, वंश, जन्मस्थान, निवास स्थान, इत्यादि के नाम पर दो या अनेक समूह में फूट डालने की कोशिश करेगा और देश में सौहाद्र बिगाड़ेगा

(क) बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा संकेतो या दृशरुपानो अन्यथा, धार्मिक, मूलवंशीय या भाषीय या प्रादेशिक, समूहों, जातियों, या समुदायों के बीच असौहाद्र अथवा शत्रुता, घृणा अथवा वैमनश् की भावनाए, धर्म, वंश, जन्मस्थान, निवास स्थान, इत्यादि के नाम पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयास करेगा, अथवा

(ख) ऐसा कोई भी कार्य करेगा जो विभिन्य धार्मिक, भाषीयी, प्रादेशिक समूहों, जातियों, या समुदायों के बीच सौहाद्र बने रहने देने पर विपरीत प्रभाव डालेगा डालने वाला है और लोकशांति में विघ्न डालता है या जिस से उस में विघ्न पड़ने की सम्भावना है, अथवा

(ग़) कोई ऐसे अभयास आंदोलन, कवायत या कोई वैसा कार्यकलाप इस आशय से संचालित करेगा कि उस में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, भाषीयी, प्रादेशिक  समूहों, जातियों, या समुदायों के आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के प्रशिक्षित किये जायेंगे या समभाव जानते हुए संचालित करेगा अथवा ऐसे कार्यकलाप में भाग लेने वाले वयक्ति किसी धार्मिक, भाषीयी, प्रादेशिक  समूहों, जातियों, या समुदायों में किसी भी प्रकार से असुरक्षा की भावना उत्पन्न करेगा या करने की साम्भवना हो

तो वह कारावास जिस की अवधि तीन वर्ष तक हो सकती है या जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जायेगा

2. जो कोई उपधारा (1) में विशिष्ट अपराध किसी पूजा स्थान में करेगा अथवा किसी जमाव में, जो कोई धार्मिक पूजा या धार्मिक कार्य में लगा हुआ है में करेगा तो वह कारावास जिस की अवधि 5 वर्ष तक हो सकती है या जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जायेगा

दंड संहिता की धारा 153(ख)के अनुसार

राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन

(1) जो कोई लिखे गए या बोले गए शब्दों द्वाराया संकेतो द्वारा या दृश्यरुपणों द्वारा, अन्यथा :

(क) ऐसा कोई लांछन लगाएगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्ति इस कारण की वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य है, विधि द्वारा स्थापित भारत के सविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की प्रभुता और मर्यादा की अखंडता नहीं बनाये रख सकते, अथवा 

(ख) यह प्रख्यान करेगा या परामर्श देगा, सलाह देगा, प्रचार करेगा, या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य है, भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकार नहीं दिए जाये या वंचित किया जाये, अथवा

(ग) किसी वर्ग के व्यक्तियों की, बाध्यता के सम्बद्ध में इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, कोई प्रख्यान करेगा, परामर्श देगा, अभिवाक् करेगा या आपील करेगा या प्रकाशित करेगा, और ऐसे प्रख्यान, परामर्श, अभिवाक् या अपील से ऐसे सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के बीच असमंजस्य, अथवा शत्रुता या घृणा या वैमनस्य की भावना उत्पन होती है या उत्पन होना संभाव्य है,

वह कारावास से जो 3 वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जायेगा

(2)  जो कोई उपधारा (1) में विनिदिर्ष्ट कोई अपराध किसी उपासना स्थल में या धामिक उपासना, या धार्मिक कर्म करने में लगे हुए किसी जमाव में करेगा, वह कारावास से जो 5 वर्ष तक हो सकेगी, और जुर्माने के भी, या दोनों से दण्डित किया जायेगा 

295 ए- विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किये गए हो या किया गया हो

जो कोई भी ब्यक्ति भारत का नागरिको के किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या फिर संकेतों द्वारा या फिर द्रश्यरूपनों द्वारा या अन्य किसी भी तरह से करेगा या फिर करने का प्रयत्न करेगा वह दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी या फिर जुर्माने से या फिर इन दोनों से ही दण्डित किया जाएगा.

इंडियन कानून धारा 298 आईपीसी - इंडियन पीनल कोड - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि

जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा इंडियन कानून धारा 505 आईपीसी - लोक रिष्टिकारक वक्तव्य

[(1)] जो कोई किसी कथन, जनश्रुति या रिपोर्ट की-

(क) इस आशय से कि, या जिससे यह सम्भाव्य हो कि, 3[भारत की] सेना, 4[नौसेना या वायुसेना] का कोई आफिसर, सैनिक, 5[नाविक या वायुसैनिक] विद्रोह करे या अन्यथा वह अपने उस नाते, अपने कर्तव्य की अवहेलना करे या उसके पालन में असफल रहे, अथवा 

(ख) इस आशय से कि, या जिससे यह सम्भाव्य हो कि, लोक या लोक के किसी भाग को ऐसा भय या संत्रास कारित हो जिससे कोई व्यक्ति राज्य के विरुद्ध या लोक-प्रशान्ति के विरुद्ध अपराध करने के लिए उत्प्रेरित हो, अथवा 

(ग) इस आशय से कि, या जिससे यह सम्भाव्य हो कि, उससे व्यक्तियों का कोई वर्ग या समुदाय किसी दूसरे वर्ग या समुदाय के विरुद्ध अपराध करने के लिए उद्दीप्त किया जाए,

रचेगा, प्रकाशित करेगा या परिचालित करेगा, वह कारावास से, जो 6[तीन वर्ष] तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा.

7[(2) विभिन्न वर्गों में शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य पैदा या सम्प्रवर्तित करने वाले कथन--जो कोई जनश्रुति या संत्रासकारी समाचार अन्तर्विष्ट करने वाले किसी कथन या रिपोर्ट को, इस आशय से कि, या जिससे यह संभाव्य हो कि, विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर पैदा या संप्रवर्तित हो, रचेगा, प्रकाशित करेगा या परिचालित करेगा, वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा। 

(3) पूजा के स्थान आदि में किया गया उपधारा (2) के अधीन अपराध--जो कोई उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अपराध किसी पूजा के स्थान में या किसी जमाव में, जो धार्मिक पूजा या धार्मिक कर्म करने में लगा हुआ हो, करेगा, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।] 
अपवाद--ऐसा कोई कथन, जनश्रुति या रिपोर्ट इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत अपराध की कोटि में नहीं आती, जब उसे रचने वाले, प्रकाशित करने वाले या परिचालित करने वाले व्यक्ति के पास इस विश्वास के लिए युक्तियुक्त आधार हो कि ऐसा कथन, जनश्रुति या रिपोर्ट सत्य है और 8[वह उसे सद्भावपूर्वक तथा पूर्वोक्त जैसे किसी आशय के बिना] रचता है, प्रकाशित करता है या परिचालित करता है।

 

 

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अनुवाद सौजन्य – सदफ़ जाफ़र

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